महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभरतश्रेष्ठ! ये तथा और भी नाना रूपधारिणी बहुत-सी सहस्रों मातृकाएँ हैं, जो कुमार कार्तिकेयका अनुसरण करती हैं ॥ ३० १/२ ॥
दीर्घनख्यो दीर्घदन्त्यो दीर्घतुण्ड्यश्च भारत ॥ ३१ ॥
सबला मधुराश्चैव यौवनस्थाः स्वलंकृताः ।
माहात्म्येन च संयुक्ताः कामरूपधरास्तथा ॥ ३२ ॥
भरतनन्दन! इनके नख, दाँत और मुख सभी विशाल हैं। वे सबला, मधुरा (सुन्दरी), युवावस्थासे सम्पन्न तथा वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हैं। इनकी बड़ी महिमा है। ये अपनी इच्छाके अनुसार रूप धारण करनेवाली हैं ॥ ३१-३२ ॥
निर्मांसगात्र्यः श्वेताश्च तथा काञ्चनसंनिभाः ।
कृष्णमेघनिभाश्चान्या धूम्राश्च भरतर्षभ ॥ ३३ ॥
इनमेंसे कुछ मातृकाओंके शरीर केवल हड्डियोंके ढाँचे हैं। उनमें मांसका पता नहीं है। कुछ श्वेतवर्णकी हैं और कितनोंकी ही अंगकान्ति सुवर्णके समान है। भरतश्रेष्ठ! कुछ मातृकाएँ कृष्णमेघके समान काली तथा कुछ धूम्रवर्णकी हैं ॥ ३३ ॥
अरुणाभा महाभोगा दीर्घकेश्यः सिताम्बराः ।
ऊर्ध्ववेणीधराश्चैव पिङ्गाक्ष्यो लम्बमेखलाः ॥ ३४ ॥
कितनोंकी कान्ति अरुणवर्णकी है। वे सभी महान् भोगोंसे सम्पन्न हैं। उनके केश बड़े-बड़े और वस्त्र उज्ज्वल हैं। वे ऊपरकी ओर वेणी धारण करनेवाली, भूरी आँखोंसे सुशोभित तथा लम्बी मेखलासे अलंकृत हैं ॥
लम्बोदर्यो लम्बकर्णास्तथा लम्बपयोधराः ।
ताम्राक्ष्यस्ताम्रवर्णाश्च हर्यक्ष्यश्च तथा पराः ॥ ३५ ॥
उनमेंसे किन्हींके उदर, किन्हींके कान तथा किन्हींके दोनों स्तन लंबे हैं। कितनोंकी आँखें ताँबेके समान लाल रंगकी हैं। कुछ मातृकाओंके शरीरकी कान्ति भी ताम्रवर्णकी हैं। बहुतोंकी आँखें काले रंगकी हैं ॥ ३५ ॥
वरदाः कामचारिण्यो नित्यं प्रमुदितास्तथा ।
याम्या रौद्रास्तथा सौम्याः कौबेर्योऽथ महाबलाः ॥ ३६ ॥
वारुण्योऽथ च माहेन्द्र्यस्तथाऽऽग्नेय्यः परंतप ।
वायव्याश्चाथ कौमार्यो ब्राह्मयश्च भरतर्षभ ॥ ३७ ॥
वैष्णव्यश्च तथा सौर्यो वाराह्यश्च महाबलाः ।
रूपेणाप्सरसां तुल्या मनोहार्यो मनोरमाः ॥ ३८ ॥
वे वर देनेमें समर्थ, अपनी इच्छाके अनुसार चलनेवाली और सदा आनन्दमें निमग्न रहनेवाली हैं। शत्रुओंको संताप देनेवाले भरतश्रेष्ठ! उन मातृकाओंमेंसे कुछ यमकी शक्तियाँ हैं, कुछ रुद्रकी। कुछ सोमकी शक्तियाँ हैं और कुछ कुबेरकी। वे सब-की-सब महान् बलसे सम्पन्न हैं। इसी तरह कुछ वरुणकी, कुछ देवराज इन्द्रकी, कुछ अग्नि, वायु, कुमार, ब्रह्मा,