भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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जो किसी प्रकार प्राण बचानेके प्रयत्नमें लगे हुए थे, एकदम घबराये हुए थे और सारा उत्साह खो बैठे थे ॥ १२९ ॥
अन्योन्यं सम्परिष्वज्य शयानान् द्रवतोऽपरान् ।
संलीनान् युद्ध्यमानांश्च सर्वान् द्रौणिरपोथयत् ॥ १३० ॥
कुछ लोग एक-दूसरेसे लिपटकर सो रहे थे, दूसरे भाग रहे थे, तीसरे छिप गये थे और चौथी श्रेणीके लोग जूझ रहे थे, उन सबको द्रोणकुमारने वहाँ मार गिराया ॥
दह्यमाना हुताशेन वध्यमानाश्च तेन ते ।
परस्परं तदा योधा अनयन् यमसादनम् ॥ १३१ ॥
एक ओर लोग आगसे जल रहे थे और दूसरी ओर अश्वत्थामाके हाथसे मारे जाते थे, ऐसी दशामें वे सब योद्धा स्वयं ही एक-दूसरेको यमलोक भेजने लगे ॥
तस्या रजन्यास्त्वर्धेन पाण्डवानां महत् बलम् ।
गमयामास राजेन्द्र द्रौणिर्यमनिवेशनम् ॥ १३२ ॥
राजेन्द्र! उस रातका आधा भाग बीतते-बीतते द्रोणपुत्र अश्वत्थामाने पाण्डवोंकी उस विशाल सेनाको यमराजके घर भेज दिया ॥ १३२ ॥
निशाचराणां सत्त्वानां रात्रिः सा हर्षवर्धिनी ।
आसीन्नरगजाश्वानां रौद्री क्षयकरी भृशम् ॥ १३३ ॥
वह भयानक रात्रि निशाचर प्राणियोंका हर्ष बढ़ानेवाली थी और मनुष्यों, घोड़ों तथा हाथियोंके लिये अत्यन्त विनाशकारिणी सिद्ध हुई ॥ १३३ ॥
तत्रादृश्यन्त रक्षांसि पिशाचाश्च पृथग्विधाः ।
खादन्तो नरमांसानि पिबन्तः शोणितानि च ॥ १३४ ॥
वहाँ नाना प्रकारकी आकृतिवाले बहुत-से राक्षस और पिशाच मनुष्योंके मांस खाते और खून पीते दिखायी देते थे ॥ १३४ ॥
करालाः पिङ्गलाश्चैव शैलदन्ता रजस्वलाः ।
जटिला दीर्घशङ्खाश्च पञ्चपादा महोदराः ॥ १३५ ॥
वे बड़े ही विकराल और पिंगलवर्णके थे। उनके दाँत पहाड़ों-जैसे जान पड़ते थे। वे सारे अंगोंमें धूल लपेटे और सिरपर जटा रखाये हुए थे। उनके माथेकी हड्डी बहुत बड़ी थी। उनके पाँच-पाँच पैर और बड़े-बड़े पेट थे ॥ १३५ ॥
पश्चादङ्गुलयो रूक्षा विरूपा भैरवस्वनाः ।
घण्टाजालावसक्ताश्च नीलकण्ठा विभीषणाः ॥ १३६ ॥
सपुत्रदाराः सक्रूराः सुदुर्दर्शाः सुनिर्घृणाः ।
विविधानि च रूपाणि तत्रादृश्यन्त रक्षसाम् ॥ १३७ ॥
उनकी अंगुलियाँ पीछेकी ओर थीं। वे रूखे, कुरूप और भयंकर गर्जना करनेवाले थे। बहुतोंने घंटोंकी मालाएँ पहन रखी थीं। उनके गलेमें नील चिह्न था। वे बड़े भयानक

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