भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 3051

'महारथी राजा बाह्लिक, सिन्धुराज जयद्रथ, सोमदत्त तथा भूरिश्रवाका भी आप मेरी ओरसे आलिंगन करें ।।

तथा पूर्वगतानन्यान् स्वर्गे पार्थिवसत्तमान् ।। ४५ ।। अस्मद्वाक्यात् परिष्वज्य सम्पृच्छेस्त्वमनामयम् ।। ४६ ।। 'दूसरे-दूसरे भी जो नृपश्रेष्ठ पहलेसे ही स्वर्गलोकमें जा पहुँचे हैं, उन सबको मेरे कथनानुसार हृदयसे लगाकर उनकी कुशल पूछें' ।। ४५-४६ ।।

संजय उवाच

इत्येवमुक्त्वा राजानं भग्नसक्थमचेतनम् । अश्वत्थामा समुद्वीक्ष्य पुनर्वचनमब्रवीत् ।। ४७ ।। **संजय कहते हैं—**महाराज! जिसकी जाँघें टूट गयी थीं, उस अचेत पड़े हुए राजा दुर्योधनसे ऐसा कहकर अश्वत्थामाने पुनः उसकी ओर देखा और इस प्रकार कहा — ।। ४७ ।।

दुर्योधन जीवसि त्वं वाक्यं श्रोत्रसुखं शृणु । सप्त पाण्डवतः शेषा धार्तराष्ट्रास्त्रयो वयम् ।। ४८ ।। 'राजा दुर्योधन! यदि आप जीवित हों तो यह कानोंको सुख देनेवाली बात सुनें। पाण्डवपक्षमें केवल सात और कौरवपक्षमें सिर्फ हम तीन ही व्यक्ति बच गये हैं ।।

ते चैव भ्रातरः पञ्च वासुदेवोऽथ सात्यकिः । अहं च कृतवर्मा च कृपः शारद्वतस्तथा ।। ४९ ।। 'उधर तो पाँचों भाई पाण्डव, श्रीकृष्ण और सात्यकि बचे हैं और इधर मैं, कृतवर्मा तथा शरद्वान्‌के पुत्र कृपाचार्य शेष रह गये हैं ।। ४९ ।।

द्रौपदेया हताः सर्वे धृष्टद्युम्नस्य चात्मजाः । पञ्चाला निहताः सर्वे मत्स्यशेषं च भारत ।। ५० ।। 'भरतनन्दन! द्रौपदी तथा धृष्टद्युम्नके सभी पुत्र मारे गये, समस्त पांचालोंका संहार कर दिया गया और मत्स्य देशकी अवशिष्ट सेना भी समाप्त हो गयी ।। ५० ।।

कृते प्रतिकृतं पश्य हतपुत्रा हि पाण्डवाः । सौप्तिके शिबिरं तेषां हतं सनरवाहनम् ।। ५१ ।। 'राजन्! देखिये, शत्रुओंकी करनीका कैसा बदला चुकाया गया? पाण्डवोंके भी सारे पुत्र मार डाले गये। रातमें सोते समय मनुष्यों और वाहनोंसहित उनके सारे शिविरका नाश कर दिया गया ।। ५१ ।।

मया च पापकर्मासौ धृष्टद्युम्नो महीपते । प्रविश्य शिबिरं रात्रौ पशुमारेण मारितः ।। ५२ ।।