भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 404

अथ दस्युगणाः श्रुत्वा दृष्ट्वा चैनं तथाविधम् ॥ २७ ॥ सम्भूय तस्य नृपतेः समारब्धारिचिकीर्षितुम् । तदनन्तर लुटेरोंने राजाके वैभवकी बात सुनकर तथा उन्हें वैसा ही सम्पन्न देखकर संगठित हो उनके यहाँ लूटपाट आरम्भ कर दी ॥ २७ १/२ ॥ केचित् तत्राब्रुवन् राज्ञः पुत्रं गृह्णीम वै स्वयम् ॥ २८ ॥ सोऽस्याकरः काञ्चनस्य तस्य यत्नं चरामहे । उन डाकुओंमेंसे कोई-कोई इस प्रकार बोले—‘हम सब लोग स्वयं इस राजाके पुत्रको अधिकारमें कर लें; क्योंकि वही इस सुवर्णकी खान है। अतः हम उसीको पकड़नेका यत्न करें’ ॥ २८ १/२ ॥ ततस्ते दस्यवो लुब्धाः प्रविश्य नृपतेर्गृहम् ॥ २९ ॥ राजपुत्रं तथा जह्रुः सुवर्णष्ठीविनं बलात् । तब उन लोभी लुटेरोंने राजमहलमें प्रवेश करके राजकुमार सुवर्णष्ठीवीको बलपूर्वक हर लिया ॥ २९ १/२ ॥ गृह्यैनमनुपायज्ञा नीत्वारण्यमचेतसः ॥ ३० ॥ हत्वा विशस्य चापश्यन् लुब्धा वसु न किञ्चन । तस्य प्राणैर्विमुक्तस्य नष्टं तद् वरदं वसु ॥ ३१ ॥ योग्य उपायको न जाननेवाले उन विवेकशून्य डाकुओंने उसे वनमें ले जाकर मार डाला और उसके शरीरके टुकड़े-टुकड़े करके देखा, परंतु उन्हें थोड़ा-सा भी धन नहीं दिखायी दिया। उसके प्राणशून्य होते ही वह वरदायक वैभव नष्ट हो गया ॥ ३०-३१ ॥ दस्यवश्च तदान्योन्यं जघ्नुर्मूर्खा विचेतसः । हत्वा परस्परं नष्टाः कुमारं चाद्भुतं भुवि ॥ ३२ ॥ असम्भाव्यं गता घोरं नरकं दुष्कारिणः । उस समय वे विचारशून्य मूर्ख एवं दुराचारी दस्यु भूमण्डलके उस अद्भुत और असम्भव कुमारका वध करके परस्पर एक-दूसरेको मारने लगे। इस प्रकार मार-पीट करके वे भी नष्ट हो गये और भयंकर नरकमें पड़ गये ॥ ३२ १/२ ॥ तं दृष्ट्वा निहतं पुत्रं वरदत्तं महातपाः ॥ ३३ ॥ विललाप सुदुःखार्तो बहुधा करुणं नृपः । मुनिके वरसे प्राप्त हुए उस पुत्रको मारा गया देख वे महातपस्वी नरेश अत्यन्त दुःखसे आतुर हो नाना प्रकारसे करुणाजनक विलाप करने लगे ॥ ३३ १/२ ॥ विलपन्तं निशम्याथ पुत्रशोकहतं नृपम् ॥ ३४ ॥ प्रत्यदृश्यत देवर्षिर्नारदस्तस्य संनिधौ ।