भारतकोश
महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व

Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished3,237 पृष्ठ

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पृष्ठ 476

दृप्तानां धार्तराष्ट्राणां सिंहनादो मया श्रुतः ।। ५९ ।।
युयुत्सुश्चापि कृष्णेन श्रुतो वीरानुपालभन् ।
'मैंने घमण्डमें भरे हुए धृतराष्ट्रपुत्रोंका सिंहनाद सुना है और श्रीकृष्णने यह भी सुना है कि युयुत्सु उन कौरववीरोंको इस प्रकार उपालम्भ दे रहा था ।। ५९ १/२ ।।'
अशक्नुवन्तो बीभत्सुं बालं हत्वा महारथाः ।। ६० ।।
किं मोदध्वमधर्मज्ञाः पाण्डवं दृश्यतां बलम् ।
'युयुत्सु कह रहा था, धर्मको न जाननेवाले महारथी कौरवो! अर्जुनपर जब तुम्हारा वश न चला, तब तुम एक बालककी हत्या करके क्यों आनन्द मना रहे हो? कल पाण्डवोंका बल देखना ।। ६० १/२ ।।'
किं तयोर्विप्रियं कृत्वा केशवार्जुनयोर्मृधे ।। ६१ ।।
सिंहवन्नदथ प्रीताः शोककाल उपस्थिते ।
'रणक्षेत्रमें श्रीकृष्ण और अर्जुनका अपराध करके तुम्हारे लिये शोकका अवसर उपस्थित है, ऐसे समयमें तुमलोग प्रसन्न होकर सिंहनाद कैसे कर रहे हो? ।। ६१ १/२ ।।'
आगमिष्यति वः क्षिप्रं फलं पापस्य कर्मणः ।। ६२ ।।
अधर्मो हि कृतस्तीव्रः कथं स्यादफलश्चिरम् ।
'तुम्हारे पापकर्मका फल तुम्हें शीघ्र ही प्राप्त होगा। तुमलोगोंने घोर पाप किया है। उसका फल मिलनेमें अधिक विलम्ब कैसे हो सकता है? ।। ६२ १/२ ।।'
इति तान् परिभाषन् वै वैश्यापुत्रो महामतिः ।। ६३ ।।
अपायाच्छस्त्रमुत्सृज्य कोपदुःखसमन्वितः ।
'राजा धृतराष्ट्रकी वैश्यजातीय पत्नीका परम बुद्धिमान् पुत्र युयुत्सु कोप और दुःखसे युक्त हो कौरवोंसे उपर्युक्त बातें कहकर शस्त्र त्यागकर चला आया है' ।।
किमर्थमेतन्नाख्यातं त्वया कृष्ण रणे मम ।। ६४ ।।
अधाक्षं तानहं क्रूरांस्तदा सर्वान् महारथान् ।
'श्रीकृष्ण! आपने रणक्षेत्रमें ही यह बात मुझसे क्यों नहीं बता दी? मैं उसी समय उन समस्त क्रूर महारथियोंको जलाकर भस्म कर डालता' ।। ६४ १/२ ।।

संजय उवाच

पुत्रशोकार्दितं पार्थं ध्यायन्तं साश्रुलोचनम् ।। ६५ ।।
निगृह्य वासुदेवस्तं पुत्राधिभिरभिप्लुतम् ।
मैवमित्यब्रवीत् कृष्णस्तीव्रशोकसमन्वितम् ।। ६६ ।।
संजय कहते हैं—महाराज! इस प्रकार अर्जुनको पुत्रशोकसे पीड़ित और उसीका चिन्तन करते हुए नेत्रोंसे आँसू बहाते देख भगवान् श्रीकृष्णने उन्हें पकड़कर सँभाला। वे