महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 716, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंराजन्! फिर भीमसेनने हँसते हुए नौ पैने बाणों-द्वारा ऋष्यशृंगकुमार अमर्षशील राक्षसराज अलम्बुषको घायल कर दिया ॥ १५ ॥ तद् रक्षः समरे विद्धं कृत्वा नादं भयावहम् । अभ्यद्रवत् ततो भीमं ये च तस्य पदानुगाः ॥ १६ ॥ तब समरांगणमें घायल हुआ वह राक्षस भयंकर गर्जना करके भीमसेनकी ओर दौड़ा। उसके सेवकोंने भी उसीका साथ दिया ॥ १६ ॥ स भीमं पञ्चभिर्विद्ध्वा शरैः संनतपर्वभिः । भैमान् परिजघानाशु रथांस्त्रिशतमाहवे ॥ १७ ॥ उसने झुकी हुई गाँठवाले पाँच बाणोंद्वारा भीमसेनको घायल करके उनके साथ आये हुए तीन सौ रथियोंका समरभूमिमें शीघ्र ही संहार कर डाला ॥ १७ ॥ पुनश्चतुःशतान् हत्वा भीमं विव्याध पत्रिणा । सोऽतिविद्धस्तथा भीमो राक्षसेन महाबलः ॥ १८ ॥ निपपात रथोपस्थे मूर्च्छयाभिपरिप्लुतः । फिर चार सौ योद्धाओंको मारकर भीमसेनको भी एक बाणसे घायल किया। इस प्रकार राक्षसके द्वारा अत्यन्त घायल किये जानेपर महाबली भीमसेन मूर्च्छित हो रथकी बैठकमें गिर पड़े ॥ १८ १/२ ॥ प्रतिलभ्य ततः संज्ञां मारुतिः क्रोधमूर्च्छितः ॥ १९ ॥ विकृष्य कार्मुकं घोरं भारसाधनमुत्तमम् । अलम्बुषं शरैस्तीक्ष्णैरर्दयामास सर्वतः ॥ २० ॥ तदनन्तर पुनः होशमें आकर क्रोधसे व्याकुल हुए वायुपुत्र भीमने भार वहन करनेमें समर्थ, उत्तम तथा भयंकर धनुष तानकर पैने बाणोंद्वारा सब ओरसे अलम्बुषको पीड़ित कर दिया ॥ १९-२० ॥ स विद्धो बहुभिर्बाणैर्नीलाञ्जनचयोपमः । शुशुभे सर्वतो राजन् प्रफुल्ल इव किंशुकः ॥ २१ ॥ राजन्! काले काजलके ढेरके समान वह राक्षस बहुत-से बाणोंद्वारा सब ओरसे घायल होकर लहूलुहान हो खिले हुए पलाशके वृक्षके समान सुशोभित होने लगा ॥ २१ ॥ स वध्यमानः समरे भीमचापच्युतैः शरैः । स्मरन् भ्रातृवधं चैव पाण्डवेन महात्मना ॥ २२ ॥ घोरं रूपमथो कृत्वा भीमसेनमभाषत । भीमसेनके धनुषसे छूटे हुए बाणोंद्वारा समरभूमिमें घायल होकर और महात्मा पाण्डुकुमार भीमके द्वारा किये गये अपने भाईके वधका स्मरण करके उस राक्षसने भयंकर रूप धारण कर लिया और भीमसेनसे कहा— ॥ २२ १/२ ॥ तिष्ठेदानीं रणे पार्थ पश्य मेऽद्य पराक्रमम् ॥ २३ ॥