महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 792, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंषोडशाधिकशततमोऽध्यायः
सात्यकिका पराक्रम तथा दुर्योधन और कृतवर्माकी पुनः पराजय
संजय उवाच
ते किरन्तः शरव्रातान् सर्वे यत्ताः प्रहारिणः ।
त्वरमाणा महाराज युयुधानमयोधयन् ॥ १ ॥
संजय कहते हैं—महाराज! वे प्रहारकुशल सम्पूर्ण योद्धा सावधान हो बड़ी फुर्तीके साथ बाणसमूहोंकी वर्षा करते हुए वहाँ युयुधानके साथ युद्ध करने लगे ॥ १ ॥
तं द्रोणः सप्तसप्तत्या जघान निशितैः शरैः ।
दुर्मर्षणो द्वादशभिर्दुःसहो दशभिः शरैः ॥ २ ॥
द्रोणाचार्यने सात्यकिको सतहत्तर तीखे बाणोंसे घायल कर दिया। फिर दुर्मर्षणने बारह और दुःसहने दस बाणोंसे उन्हें बींध डाला ॥ २ ॥
विकर्णश्चापि निशितैस्त्रिंशद्भिः कङ्कपत्रिभिः ।
विव्याध सव्ये पार्श्वे तु स्तनाभ्यामन्तरे तथा ॥ ३ ॥
तत्पश्चात् विकर्णने भी कंककी पाँखवाले तीस तीखे बाणोंसे सात्यकिकी बायीं पसली और छाती छेद डाली ॥ ३ ॥
दुर्मुखो दशभिर्बाणैस्तथा दुःशासनोऽष्टभिः ।
चित्रसेनश्च शैनेयं द्वाभ्यां विव्याध मारिष ॥ ४ ॥
आर्य! तदनन्तर दुर्मुखने दस, दुःशासनने आठ और चित्रसेनने दो बाणोंसे सात्यकिको घायल कर दिया ॥ ४ ॥
दुर्योधनश्च महता शरवर्षेण माधवम् ।
अपीडयद् रणे राजन् शूराश्चान्ये महारथाः ॥ ५ ॥
राजन्! उस रणक्षेत्रमें दुर्योधन तथा अन्य शूरवीर महारथियोंने भारी बाण-वर्षा करके सात्यकिको पीड़ित कर दिया ॥ ५ ॥
सर्वतः प्रतिविद्धस्तु तव पुत्रैर्महारथैः ।
तान् प्रत्यविध्यद् वार्ष्णेयः पृथक् पृथगजिह्मगैः ॥ ६ ॥
आपके महारथी पुत्रोंद्वारा सब ओरसे घायल किये जानेपर वृष्णिवंशी वीर सात्यकिने उन सबको पृथक्-पृथक् अपने बाणोंसे बींधकर बदला चुकाया ॥ ६ ॥
भारद्वाजं त्रिभिर्बाणैर्दुःसहं नवभिः शरैः ।
विकर्णं पञ्चविंशत्या चित्रसेनं च सप्तभिः ॥ ७ ॥