महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व
Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1328, कुल 2450 में से
संदर्भ में पढ़ेंतमुग्रमुग्रकर्माणमुग्रं कर्म समास्थितम् । ब्रह्मणोपचितिं कुर्वन् जघान पुरुषोत्तमः ॥ १५ ॥ उसका स्वभाव बड़ा ही उग्र था। वह सदा ही भयानक कर्म करनेवाला था। भयंकर कर्म करनेका निश्चय लेकर आये हुए उस असुरको पुरुषोत्तम भगवान् विष्णुने ब्रह्माजीका हित करनेके लिये मार डाला ॥ १५ ॥ तस्य तात वधात् सर्वे देवदानवमानवाः । मधुसूदनमित्याहूर्ऋषभं सर्वसात्वताम् ॥ १६ ॥ तात! उस मधुका वध करनेके कारण ही सम्पूर्ण देवता, दानव और मानव—इन सर्वसात्वतशिरोमणि श्रीकृष्णको मधुसूदन कहते हैं ॥ १६ ॥ ब्रह्मानुससृजे पुत्रान् मानसान् दक्षसप्तमान् । मरीचिमत्र्यङ्गिरसं पुलस्त्यं पुलहं क्रतुम् ॥ १७ ॥ ब्रह्माजीने सात मानस पुत्रोंको उत्पन्न किया, जिनमें दक्ष प्रजापति सातवें थे (ये ही सबसे प्रथम उत्पन्न हुए थे)। शेष छः पुत्रोंके नाम इस प्रकार हैं—मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह और क्रतु ॥ १७ ॥ मरीचिः कश्यपं तात पुत्रमग्रजमग्रजः । मानसं जनयामास तेजसं ब्रह्मवित्तमम् ॥ १८ ॥ तात! इन छः पुत्रोंमें सबसे बड़े थे मरीचि। उन्होंने अपने मनसे ही ब्रह्मवेत्ताओंमें श्रेष्ठ कश्यप नामक श्रेष्ठ पुत्रको जन्म दिया, जो बड़े ही तेजस्वी हैं ॥ १८ ॥ अङ्गुष्ठात् ससृजे ब्रह्मा मरीचेरपि पूर्वजम् । सोऽभवद् भरतश्रेष्ठ दक्षो नाम प्रजापतिः ॥ १९ ॥ भरतश्रेष्ठ! ब्रह्माजीने दक्षको अपने अँगूठेसे उत्पन्न किया था। वे मरीचिसे भी बड़े थे। इसलिये प्रजापतिके पदपर दक्ष प्रतिष्ठित हुए ॥ १९ ॥ तस्य पूर्वमजायन्त दश तिस्रश्च भारत । प्रजापतेर्दुहितरस्तासां ज्येष्ठाभवद् दितिः ॥ २० ॥ भरतनन्दन! प्रजापति दक्षके पहले तेरह कन्याएँ उत्पन्न हुईं, जिनमें दिति सबसे बड़ी थी ॥ २० ॥ सर्वधर्मविशेषज्ञः पुण्यकीर्तिर्महायशाः । मारीचः कश्यपस्तात सर्वासामभवत् पतिः ॥ २१ ॥ तात! सम्पूर्ण धर्मोंके विशेषज्ञ, पुण्यकीर्ति, महायशस्वी मरीचिनन्दन कश्यप उन सब कन्याओंके पति हुए ॥ २१ ॥ उत्पाद्य तु महाभागस्तासामवरजा दश । ददौ धर्माय धर्मज्ञो दक्ष एव प्रजापतिः ॥ २२ ॥