भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ

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पृष्ठ 1329

तदनन्तर धर्मके ज्ञाता महाभाग प्रजापति दक्षने दस कन्याएँ और उत्पन्न कीं, जो पूर्वोक्त तेरह कन्याओंसे छोटी थीं। उन सबका विवाह उन्होंने धर्मके साथ कर दिया ।। २२ ।।

धर्मस्य वसवः पुत्रा रुद्राश्चामिततेजसः ।
विश्वेदेवाश्च साध्याश्च मरुत्वन्तश्च भारत ।। २३ ।।
भरतनन्दन! धर्मके वसु, अमित तेजस्वी रुद्र, विश्वेदेव, साध्य तथा मरुद्गण—ये बहुत-से पुत्र हुए ।।

अपराश्च यवीयस्यस्ताभ्योऽन्याः सप्तविंशतिः ।
सोमस्तासां महाभागः सर्वासामभवत् पतिः ।। २४ ।।
इतरास्तु व्यजायन्त गन्धर्वांस्तुरगान् द्विजान् ।
गाश्च किंपुरुषान्मत्स्यानुद्भिज्जांश्च वनस्पतीन् ।। २५ ।।
तत्पश्चात् दक्षके अन्य सत्ताईस कन्याएँ हुईं, जो पूर्वोक्त कन्याओंसे छोटी थीं। महाभाग सोम उन सबके पति हुए। इन सबके अतिरिक्त भी दक्षके बहुत-सी कन्याएँ हुईं, जिन्होंने गन्धर्वों, अश्वों, पक्षियों, गौओं, किम्पुरुषों, मत्स्यों, उद्भिज्जों और वनस्पतियोंको जन्म दिया ।। २४-२५ ।।

आदित्यानदितिर्जज्ञे देवश्रेष्ठान् महाबलान् ।
तेषां विष्णुर्वामनोऽभूद् गोविन्दश्चाभवत् प्रभुः ।। २६ ।।
अदितिने देवताओंमें श्रेष्ठ महाबली आदित्योंको उत्पन्न किया। उन आदित्योंमें सर्वव्यापी भगवान् गोविन्द भी वामनरूपसे प्रकट हुए ।। २६ ।।

तस्य विक्रमणाच्चापि देवानां श्रीर्व्यवर्धत ।
दानवाश्च पराभूता दैतेयी चासुरी प्रजा ।। २७ ।।
उनके विक्रमसे अर्थात् विराट्रूप धारणकर तीन पैडमें त्रिलोकीको नाप लेनेके कारण देवताओंकी श्रीवृद्धि हुई। दानव पराजित हुए तथा दैत्यों और असुरोंकी प्रजा भी पराभवको प्राप्त हुई ।। २७ ।।

विप्रचित्तिप्रधानांश्च दानवानसृजद् दनुः ।
दितिस्तु सर्वानसुरान् महासत्त्वानजीजनत् ।। २८ ।।
दनुने दानवोंको जन्म दिया, जिनमें विप्रचित्ति आदि दानव प्रमुख थे। दिति समस्त असुरों—महान् शक्तिशाली दैत्योंकी जननी हुई ।। २८ ।।

अहोरात्रं च कालं च यथर्तु मधुसूदनः ।
पूर्वाह्नं चापराह्नं च सर्वमेवानुकल्पयत् ।। २९ ।।
इन्हीं श्रीमधुसूदनने दिन-रात, ऋतुके अनुसार काल, पूर्वाह्न तथा अपराह्न आदि समस्त काल-विभागकी व्यवस्था की ।। २९ ।।

प्रध्याय सोऽसृजन्मेघांस्तथा स्थावरजङ्गमान् ।

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