भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1502

विहरन् सर्वतो मुक्तो न क्वचित् परिषज्जते ।

रजश्च हि तमश्च त्वां स्पृशते न जितेन्द्रियम् ॥ १०८ ॥

‘तुम सर्वत्र विचरते हुए भी सबसे मुक्त हो। कहीं भी तुम्हारी आसक्ति नहीं है। तुमने

अपनी इन्द्रियोंको जीत लिया है; इसलिये रजोगुण और तमोगुण तुम्हारा स्पर्श नहीं कर

सकते ॥ १०८ ॥

निष्प्रीतिं नष्टसंतापमात्मानं त्वमुपाससे ।

सुहृदं सर्वभूतानां निर्वैरं शान्तमानसम् ॥ १०९ ॥

‘जो हर्षसे रहित, संतापसे शून्य, सम्पूर्ण भूतोंका सुहृद्, वैररहित और शान्तचित्त है,

उस आत्माकी तुम उपासना करते हो ॥ १०९ ॥

दृष्ट्वा त्वां मम संजाता त्वय्यनुक्रोशिनी मतिः ।

नाहमेतादृशं बुद्धं हन्तुमिच्छामि बन्धने ॥ ११० ॥

‘तुम्हें देखकर मेरे मनमें दयाका संचार हो आया है। मैं ऐसे ज्ञानी पुरुषको बन्धनमें

रखकर उसका वध करना नहीं चाहता ॥ ११० ॥

आनृशंस्यं परो धर्मो ह्यनुक्रोशश्च मे त्वयि ।

मोक्ष्यन्ते वारुणाः पाशास्त्वेमे कालपर्ययात् ॥ १११ ॥

‘किसीके प्रति क्रूरतापूर्ण बर्ताव न करना सबसे बड़ा धर्म है। तुम्हारे ऊपर मेरा पूर्ण

अनुग्रह है। कुछ समय बीतनेपर तुम्हें बाँधनेवाले ये वरुणदेवताके पाश अपने आप ही तुम्हें

छोड़ देंगे ॥ १११ ॥

प्रजानामपचारेण स्वस्ति तेऽस्तु महासुर ।

यदा श्वश्रूं स्नुषा वृद्धां परिचारेण योक्ष्यते ॥ ११२ ॥

पुत्रश्च पितरं मोहात् प्रेषयिष्यति कर्मसु ।

ब्राह्मणैः कारयिष्यन्ति वृषलाः पादधावनम् ॥ ११३ ॥

शूद्राश्च ब्राह्मणीं भार्यामुपयास्यन्ति निर्भयाः ।

वियोनिषु विमोक्ष्यन्ति बीजानि पुरुषा यदा ॥ ११४ ॥

संकरं कांस्यभाण्डैश्च बलिं चैव कुपात्रकेः ।

चातुर्वर्ण्यं यदा कृत्स्नममर्यादं भविष्यति ॥ ११५ ॥

एकैकस्ते तदा पाशः क्रमशः परिमोक्ष्यते ।

‘महान् असुर! जब प्रजाजनोंका न्यायके विपरीत आचरण होने लगेगा, तब तुम्हारा

कल्याण होगा। जब पतोहू बूढ़ी साससे अपनी सेवा-टहल कराने लगेगी और पुत्र भी

मोहवश पिताको विभिन्न प्रकारके कार्य करनेके लिये आज्ञा प्रदान करने लगेगा, शूद्र

ब्राह्मणोंसे पैर धुलाने लगेंगे तथा वे निर्भय होकर ब्राह्मण जातिकी स्त्रीको अपनी भार्या

बनाने लगेंगे, जब पुरुष निर्भय होकर मानवेतर योनियोंमें अपना वीर्य स्थापित करने लगेंगे,

जब काँसेके पात्रमें ऊँच जाति और नीच जातिके लोग एक साथ भोजन करने लगेंगे एवं