भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ

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पृष्ठ 181

सभी प्राणियोंके लिये बैठना, सोना, चलना-फिरना, उठना और खाना-पीना—ये सभी कार्य समयके अनुसार ही नियत रूपसे होते रहते हैं ।। २१ ।।
वैद्याश्चाप्यातुराः सन्ति बलवन्तश्च दुर्बलाः ।
श्रीमन्तश्चापरे षण्ढा विचित्रः कालपर्ययः ।। २२ ।।
कभी-कभी वैद्य भी रोगी, बलवान् भी दुर्बल और श्रीमान् भी असमर्थ हो जाते हैं, यह समयका उलट-फेर बड़ा अद्भुत है ।। २२ ।।
कुले जन्म तथा वीर्यमारोग्यं रूपमेव च ।
सौभाग्यमुपभोगश्च भवितव्येन लभ्यते ।। २३ ।।
उत्तम कुलमें जन्म, बल-पराक्रम, आरोग्य, रूप, सौभाग्य और उपभोग-सामग्री—ये सब होनहारके अनुसार ही प्राप्त होते हैं ।। २३ ।।
सन्ति पुत्राः सुबहवो दरिद्राणामनिच्छताम् ।
नास्ति पुत्रः समृद्धानां विचित्रं विधिचेष्टितम् ।। २४ ।।
जो दरिद्र हैं और संतानकी इच्छा नहीं रखते हैं, उनके तो बहुत-से पुत्र हो जाते हैं और जो धनवान् हैं, उनमेंसे किसी-किसीको एक पुत्र भी नहीं प्राप्त होता। विधाताकी चेष्टा बड़ी विचित्र है ।। २४ ।।
व्याधिरग्निर्जलं शस्त्रं बुभुक्षाश्वापदो विषम् ।
ज्वरश्च मरणं जन्तोरुच्चाच्च पतनं तथा ।। २५ ।।
निर्माणे यस्य यद् दिष्टं तेन गच्छति सेतुना ।
रोग, अग्नि, जल, शस्त्र, भूख, प्यास, विपत्ति, विष, ज्वर और ऊँचे स्थानसे गिरना—ये सब जीवकी मृत्युके निमित्त हैं। जन्मके समय जिसके लिये प्रारब्धवश जो निमित्त नियत कर दिया गया है, वही उसका सेतु है, अतः उसीके द्वारा वह जाता है अर्थात् परलोकमें गमन करता है ।। २५ ½ ।।
दृश्यते नाप्यतिक्रामन् निष्क्रान्तोऽथवा पुनः ।। २६ ।।
दृश्यते चाप्यतिक्रामन्निग्राह्योऽथवा पुनः ।
कोई इस सेतुका उल्लंघन करता दिखायी नहीं देता अथवा पहले भी किसीने इसका उल्लंघन किया हो, ऐसा देखनेमें नहीं आया। कोई-कोई पुरुष जो (तपस्या आदि प्रबल पुरुषार्थके द्वारा) दैवके नियन्त्रणमें रहनेयोग्य नहीं है, वह पूर्वोक्त सेतुका उल्लंघन करता भी दिखायी देता है ।। २६ ½ ।।
दृश्यते हि युवैवेह विनश्यन् वसुमान् नरः ।
दरिद्रश्च परिक्लिष्टः शतवर्षो जरान्वितः ।। २७ ।।
इस जगत्में धनवान् मनुष्य भी जवानीमें ही नष्ट होता दिखायी देता है और क्लेशमें पड़ा हुआ दरिद्र भी सौ वर्षोंतक जीवित रहकर अत्यन्त वृद्धावस्थामें मरता देखा जाता है ।। २७ ।।