भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ

पृष्ठ 2195, कुल 2450 में से

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पृष्ठ 2195

'पृथ्वी और आकाशमें जो महाबली और महान् भूत-स्वरूप साध्य नामक देवगण अदृश्यभावसे रहते हैं, उनके दुर्जय पुत्रका नाम है समान ।। ३२ ।। उदानस्तस्य पुत्रोऽभूद् व्यानस्तस्याभवत् सुतः । अपानश्च ततो ज्ञेयः प्राणश्चापि ततोऽपरः ।। ३३ ।। 'समानका पुत्र है उदान, उदानका पुत्र है व्यान, उसके पुत्रका नाम अपान जानना चाहिये और अपानसे प्राणकी उत्पत्ति हुई है ।। ३३ ।। अनपत्योऽभवत् प्राणो दुर्धर्षः शत्रुतापनः । पृथक् कर्माणि तेषां ते प्रवक्ष्यामि यथातथम् ।। ३४ ।। 'प्राणके कोई संतान नहीं हुई। वह शत्रुओंको संताप देनेवाला और दुर्जय है। उन सबके कर्म पृथक्-पृथक् हैं, जिनका मैं तुमसे यथावत्रूपसे वर्णन करता हूँ ।। ३४ ।। प्राणिनां सर्वतो वायुश्चेष्टां वर्तयते पृथक् । प्राणनाच्चैव भूतानां प्राण इत्यभिधीयते ।। ३५ ।। 'वायुदेव प्राणियोंकी पृथक्-पृथक् समस्त चेष्टाओंका सम्पादन करते हैं तथा सम्पूर्ण भूतोंको अनुप्राणित (जीवित) रखते हैं, इसलिये 'प्राण' कहलाते हैं ।। ३५ ।। प्रेरयत्यभ्रसंघातान् धूमजांश्चोष्मजांश्च यः । प्रथमः प्रथमे मार्गे प्रवहो नाम योऽनिलः ।। ३६ ।। 'जो धूम तथा गर्मीसे उत्पन्न बादलों और ओलोंको इधरसे उधर ले जाता है, वह प्रथम मार्गमें प्रवाहित होनेवाला 'प्रवह' नामक प्रथम वायु है ।। ३६ ।। अम्बरे स्नेहमभ्येत्य विद्युदभ्यश्च महाद्युतिः । आवहो नाम संवाति द्वितीयः श्वसनो नदन् ।। ३७ ।। 'जो आकाशमें रसकी मात्राओं और बिजली आदिकी उत्पत्तिके लिये प्रकट होता है, वह महान् तेजसे सम्पन्न द्वितीय वायु 'आवह' नामसे प्रसिद्ध है। वह बड़ी भारी आवाजके साथ बहता है ।। ३७ ।। उदयं ज्योतिषां शश्वत् सोमादीनां करोति यः । अन्तर्देहेषु चोदानं यं वदन्ति मनीषिणः ।। ३८ ।। यश्चतुर्भ्यः समुद्रेभ्यो वायुर्धारयते जलम् । उद्धृत्याददते चापो जीमूतेभ्योऽम्बरेऽनिलः ।। ३९ ।। योऽद्भिः संयोज्य जीमूतान् पर्जन्याय प्रयच्छति । उद्वहो नाम बंहिष्ठस्तृतीयः स सदागतिः ।। ४० ।। 'जो सदा सोम, सूर्य आदि ग्रहोंका उदय एवं उद्भव करता है, मनीषी पुरुष शरीरके भीतर जिसे 'उदान' कहते हैं, जो चारों समुद्रोंसे जलको ऊपर उठाकर जीमूत नामक मेघोंमें स्थापित करता है तथा जीमूत नामक मेघोंको जलसे संयुक्त करके उन्हें पर्जन्यके

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