भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ

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पृष्ठ 2280

त्वया कृतां च मर्यादां नातिक्रंस्यति कश्चन ॥ ६२ ॥ (वे वरदान इस प्रकार हैं—) ‘ब्रह्मन्! तुम प्रत्येक कल्पके आदिमें मेरे पुत्ररूपसे उत्पन्न होओगे। तुम्हें लोकाध्यक्षका पद प्राप्त होगा। तुम्हारा पर्यायवाची नाम होगा, अहंकारकर्ता। तुम्हारी बाँधी हुई मर्यादाका कोई उल्लंघन नहीं करेगा ।। ६१-६२ ।। त्वं चैव वरदो ब्रह्मन् वरेप्सूनां भविष्यसि । सुरासुरगणानां च ऋषीणां च तपोधन ॥ ६३ ॥ पितॄणां च महाभाग सततं संशितव्रत । विविधानां च भूतानां त्वमुपास्यो भविष्यसि ॥ ६४ ॥ ‘ब्रह्मन्! तुम वर चाहनेवाले साधकोंको वर देनेमें समर्थ होओगे। कठोर व्रतका पालन करनेवाले महाभाग तपोधन! तुम देवताओं, असुरों, ऋषियों, पितरों तथा नाना प्रकारके प्राणियोंके सदा ही उपासनीय होओगे ।। ६३-६४ ।। प्रादुर्भावगतश्चाहं सुरकार्येषु नित्यदा । अनुशास्यस्त्वया ब्रह्मन् नियोज्यश्च सुतो यथा ॥ ६५ ॥ ‘ब्रह्मन्! जब मैं देवताओंका कार्य सिद्ध करनेके लिये अवतार धारण करूँ, उन दिनों सदा तुम मुझपर शासन करना और पुत्रकी भाँति मुझे प्रत्येक कार्यमें नियुक्त करना’ ।। ६५ ।। एतांश्चान्यांश्च रुचिरान् ब्रह्मणोऽमिततेजसे । अहं दत्त्वा वरान् प्रीतो निवृत्तिपरमोऽभवम् ॥ ६६ ॥ ‘नारद! अमित तेजस्वी ब्रह्माको ये तथा और भी बहुत-से सुन्दर वर देकर मैं प्रसन्नतापूर्वक निवृत्तिपरायण हो गया ।। ६६ ।। निर्वाणं सर्वधर्माणां निवृत्तिः परमा स्मृता । तस्मान्निवृत्तिमापन्नश्चरेत् सर्वाङ्गनिर्वृतः ॥ ६७ ॥ ‘समस्त कर्मोंसे उपरत हो जाना ही परम निवृत्ति है; अतः जो निवृत्तिको प्राप्त हो गया है, वह सभी अंगोंसे सुखी होकर विचरण करे ।। ६७ ।। विद्यासहायवन्तं च आदित्यस्थं समाहितम् । कपिलं प्राहुराचार्याः सांख्यनिश्चितनिश्चयाः ॥ ६८ ॥ ‘सांख्यशास्त्रके सिद्धान्तका निश्चय करनेवाले आचार्यगण मुझे ही विद्याकी सहायतासे युक्त, सूर्यमण्डलमें स्थित एवं समाहितचित्त कपिल कहते हैं ।। ६८ ।। हिरण्यगर्भो भगवानेष छन्दसि सुष्टुतः । सोऽहं योगरतिर्ब्रह्मन् योगशास्त्रेषु शब्दितः ॥ ६९ ॥ ‘वेदमें जिनकी स्तुति की गयी है, वे भगवान् हिरण्यगर्भ मेरे ही स्वरूप हैं! ब्रह्मन्! योगीलोग जिसमें रमण करते हैं, वह योगशास्त्रप्रसिद्ध पुरुषविशेष ईश्वर भी मैं ही हूँ ।। ६९ ।।