महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व
Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 305, कुल 2450 में से
संदर्भ में पढ़ेंमरणसे रहित, स्वयम्भू एवं सनातन देवता हैं, जिन्हें इन चर्म-चक्षुओंसे देखना और बुद्धिके द्वारा सम्पूर्णरूपसे जानना असम्भव है, उन भगवान् श्रीहरि नारायण देवकी मैं शरण लेता हूँ।। ३३—३७।। यं वै विश्वस्य कर्तारं जगतस्तस्थुषां पतिम्। वदन्ति जगतोऽध्यक्षमक्षरं परमं पदम् ।। ३८ ।। जो इस विश्वके विधाता और चराचर जगत्के स्वामी हैं, जिन्हें संसारका साक्षी और अविनाशी परमपद कहते हैं, उन परमात्माकी मैं शरण ग्रहण करता हूँ।। हिरण्यवर्णं यं गर्भमदितेर्दैत्यनाशनम् । एकं द्वादशधा जज्ञे तस्मै सूर्यात्मने नमः ।। ३९ ।। जो सुवर्णके समान कान्तिमान्, अदितिके गर्भसे उत्पन्न, दैत्योंके नाशक तथा एक होकर भी बारह रूपोंमें प्रकट हुए हैं, उन सूर्यस्वरूप परमेश्वरको नमस्कार है ।। ३९ ।। शुक्ले देवान् पितॄन् कृष्णे तर्पयत्यमृतेन यः । यश्च राजा द्विजातीनां तस्मै सोमात्मने नमः ।। ४० ।। जो अपनी अमृतमयी कलाओंसे शुक्लपक्षमें देवताओंको और कृष्णपक्षमें पितरोंको तृप्त करते हैं तथा जो सम्पूर्ण द्विजोंके राजा हैं, उन सोमस्वरूप परमात्माको नमस्कार है ।। ४० ।। (हुताशनमुखैर्देवैर्धार्यते सकलं जगत् । हविःप्रथमभोक्ता यस्तस्मै होत्रात्मने नमः ॥) अग्नि जिनके मुख हैं, वे देवता सम्पूर्ण जगत्को धारण करते हैं, जो हविष्यके सबसे पहले भोक्ता हैं, उन अग्निहोत्रस्वरूप परमेश्वरको नमस्कार है ।। महत्तस्तमसः पारे पुरुषं ह्यतितेजसम् । यं ज्ञात्वा मृत्युमत्येति तस्मै ज्ञेयात्मने नमः ।। ४१ ।। जो अज्ञानमय महान् अन्धकारसे परे और ज्ञानालोकसे अत्यन्त प्रकाशित होनेवाले आत्मा हैं, जिन्हें जान लेनेपर मनुष्य मृत्युसे सदाके लिये छूट जाता है, उन ज्ञेयरूप परमेश्वरको नमस्कार है ।। ४१ ।। यं बृहन्तं बृहत्युक्थे यमग्नौ यं महाध्वरे । यं विप्रसंघा गायन्ति तस्मै वेदात्मने नमः ।। ४२ ।। उक्थनामक बृहत् यज्ञके समय, अग्न्याधानकालमें तथा महायागमें ब्राह्मणवृन्द जिनका ब्रह्मके रूपमें स्तवन करते हैं, उन वेदस्वरूप भगवान्को नमस्कार है ।। ४२ ।। ऋग्यजुःसामधामानं दशार्धहविरात्मकम् । यं सप्ततन्तुं तन्वन्ति तस्मै यज्ञात्मने नमः ।। ४३ ।। ऋग्वेद, यजुर्वेद तथा सामवेद जिसके आश्रय हैं, पाँच प्रकारका हविष्य जिसका स्वरूप है, गायत्री आदि सात छन्द ही जिसके सात तन्तु हैं, उस यज्ञके रूपमें प्रकट हुए