भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ

पृष्ठ 499, कुल 2450 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 499

यत् किञ्चिज्जयसे भूमिं ब्राह्मणाय निवेदय ।। १३ ।।
श्रुतवृत्तोपपन्नाय धर्मज्ञाय तपस्विने ।
स्वधर्मपरितृप्ताय यो न वित्तपरो भवेत् ।। १४ ।।
यदि तुम स्वधर्म-पालनके फलस्वरूप स्वर्गलोकमें उत्तम स्थानकी खोज कर रहे हो (चाहते हो) तो जितनी भूमिपर तुम विजय प्राप्त करो, वह सब शास्त्र और सदाचारसे सम्पन्न, धर्मज्ञ, तपस्वी तथा स्वधर्मसे संतुष्ट ब्राह्मणको पुरोहित बनाकर सौंप दो, जो कि धनोपार्जनमें आसक्त न हो ।। १३-१४ ।।
यो राजानं नयेद् बुद्ध्या सर्वतः परिपूर्णया ।
ब्राह्मणो हि कुले जातः कृतप्रज्ञो विनीतवान् ।। १५ ।।
श्रेयो नयति राजानं ब्रुवंश्चित्रां सरस्वतीम् ।
राजा चरति यद् धर्मं ब्राह्मणेन निदर्शितम् ।। १६ ।।
तथा जो सर्वतोभावसे परिपूर्ण अपनी बुद्धिके द्वारा राजाको सन्मार्गपर ले जा सके; क्योंकि जो ब्राह्मण उत्तम कुलमें उत्पन्न, विशुद्ध बुद्धिसे युक्त और विनयशील होता है, वह विचित्र वाणी बोलकर राजाको कल्याणके पथपर ले जाता है। जो ब्राह्मणका बताया हुआ धर्म है, उसीको राजा आचरणमें लाता है ।। १५-१६ ।।
शुश्रूषुरनहंवादी क्षत्रधर्मव्रते स्थितः ।
तावता सत्कृतः प्राज्ञश्चिरं यशसि तिष्ठति ।। १७ ।।
तस्य धर्मस्य सर्वस्य भागी राजपुरोहितः ।
क्षत्रियधर्ममें तत्पर रहनेवाला, अहंकारशून्य तथा पुरोहितकी बात सुननेके लिये उत्सुक, उतनेसे ही सम्मानको प्राप्त हुआ विद्वान् नरेश चिरकालतक यशस्वी बना रहता है तथा राजपुरोहित उसके सम्पूर्ण धर्मका भागीदार होता है ।। १७ १/२ ।।
एवमेव प्रजाः सर्वा राजानमभिसंश्रिताः ।। १८ ।।
सम्यग्वृत्ताः स्वधर्मस्था न कुतश्चिद् भयान्विताः ।
इस प्रकार राजाके आश्रयमें रहकर सारी प्रजा सदाचारपरायण, अपने-अपने धर्ममें तत्पर और सब ओरसे निर्भय हो जाती है ।। १८ १/२ ।।
राष्ट्रे चरन्ति यं धर्मं राज्ञा साध्वभिरक्षिताः ।। १९ ।।
चतुर्थं तस्य धर्मस्य राजा भागं तु विन्दति ।
राजाके द्वारा भलीभाँति सुरक्षित हुए मनुष्य राज्यमें जिस धर्मका आचरण करते हैं, उसका एक चौथाई भाग राजा भी प्राप्त कर लेता है ।। १९ १/२ ।।
देवा मनुष्याः पितरो गन्धर्वोरगराक्षसाः ।। २० ।।
यज्ञमेवोपजीवन्ति नास्ति चेष्टमराजके ।

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व · पृष्ठ 499, कुल 2450 में से · BharatKosha