भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1377, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1377

**श्रीमहेश्वरने कहा—**देवि! ऋषि और देवता भी इस परमात्माको प्रत्यक्ष नहीं देख पाते हैं। जो वास्तवमें उन परमात्माका साक्षात्कार कर लेता है, वह पुनः इस संसारमें नहीं लौटता है। देवि! अतः उस परमात्माके दर्शनसे ही परमगतिकी प्राप्ति हो जाती है। इस प्रकार यह सनातन सांख्यधर्म तुम्हें बताया गया है; जो कपिल आदि आचार्यों एवं महर्षियोंद्वारा सेवित है ।।

(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)