भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1424, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1424

जगदादिजः-जगत्‌के आदिमें हिरण्यगर्भ रूपसे स्वयं उत्पन्न होनेवाले, १४६ अनघः-पापरहित, १४७ विजयः-ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्य आदि गुणोंमें सबसे बढ़कर, १४८ जेता-स्वभावसे ही समस्त भूतोंको जीतनेवाले, १४९ विश्वयोनिः-सबके कारणरूप, १५० पुनर्वसुः-पुनः-पुनः अवतार-शरीरोंमें निवास करनेवाले ।। २९ ।।

उपेन्द्रो वामनः प्रांशुरमोघः शुचिरूर्जितः ।
अतीन्द्रः संग्रहः सर्गो धृतात्मा नियमो यमः ।। ३० ।।

१५१ उपेन्द्रः-इन्द्रके छोटे भाई, १५२ वामनः-वामनरूपसे अवतार लेनेवाले, १५३ प्रांशुः-तीनों लोकोंको लाँघनेके लिये त्रिविक्रमरूपसे ऊँचे होनेवाले, १५४ अमोघः-अव्यर्थ चेष्टावाले, १५५ शुचिः-स्मरण, स्तुति और पूजन करनेवालोंको पवित्र कर देनेवाले, १५६ ऊर्जितः-अत्यन्त बलशाली, १५७ अतीन्द्रः-स्वयंसिद्ध ज्ञान-ऐश्वर्यादिके कारण इन्द्रसे भी बढ़े-चढ़े हुए, १५८ संग्रहः-प्रलयके समय सबको समेट लेनेवाले, १५९ सर्गः-सृष्टिके कारणरूप, १६० धृतात्मा-जन्मादिसे रहित रहकर स्वेच्छासे स्वरूप धारण करनेवाले, १६१ नियमः-प्रजाको अपने-अपने अधिकारोंमें नियमित करनेवाले, १६२ यमः-अन्तःकरणमें स्थित होकर नियमन करनेवाले ।। ३० ।।

वेद्यो वैद्यः सदायोगी वीरहा माधवो मधुः ।
अतीन्द्रियो महामायो महोत्साहो महाबलः ।। ३१ ।।

१६३ वेद्यः-कल्याणकी इच्छावालोंके द्वारा जानने योग्य, १६४ वैद्यः-सब विद्याओंके जाननेवाले, १६५ सदायोगी-सदा योगमें स्थित रहनेवाले, १६६ वीरहा-धर्मकी रक्षाके लिये असुर योद्धाओंको मार डालनेवाले, १६७ माधवः-विद्याके स्वामी, १६८ मधुः-अमृतकी तरह सबको प्रसन्न करनेवाले, १६९ अतीन्द्रियः-इन्द्रियोंसे सर्वथा अतीत, १७० महामायः-मायावियोंपर भी माया डालनेवाले, महान् मायावी, १७१ महोत्साहः-जगत्‌की उत्पत्ति, स्थिति और प्रलयके लिये तत्पर रहनेवाले परम उत्साही, १७२ महाबलः-महान् बलशाली ।। ३१ ।।

महाबुद्धिर्महावीर्यो महाशक्तिर्महाद्युतिः ।
अनिर्देश्यवपुः श्रीमानमेयात्मा महाद्रिधृक् ।। ३२ ।।

१७३ महाबुद्धिः-महान् बुद्धिमान्, १७४ महावीर्यः-महान् पराक्रमी, १७५ महाशक्तिः-महान् सामर्थ्यवान्, १७६ महाद्युतिः-महान् कान्तिमान्, १७७ अनिर्देश्यवपुः-वर्णन करनेमें न आने योग्य स्वरूप, १७८ श्रीमान्-ऐश्वर्यवान्, १७९ अमेयात्मा-जिसका अनुमान न किया जा सके ऐसे आत्मावाले, १८० महाद्रिधृक्-अमृतमन्थन और गोरक्षणके समय मन्दराचल और गोवर्धन नामक महान् पर्वतोंको धारण करनेवाले ।। ३२ ।।

महेष्वासो महीभर्ता श्रीनिवासः सतां गतिः ।
अनिरुद्धः सुरानन्दो गोविन्दो गोविदां पतिः ।। ३३ ।।