भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1427, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1427

परमधाममें आरूढ़ होनेकी इच्छावालोंके लिये धर्मरूप सीढ़ियोंवाले, २६० वृषोदरः-अपने उदरमें धर्मको धारण करनेवाले, २६१ वर्धनः-भक्तोंको बढ़ानेवाले, २६२ वर्धमानः-संसाररूपसे बढ़नेवाले, २६३ विविक्तः-संसारसे पृथक् रहनेवाले, २६४ श्रुतिसागरः-वेदरूप जलके समुद्र ॥ ४१ ॥

सुभुजो दुर्धरो वाग्मी महेन्द्रो वसुदो वसुः ।
नैकरूपो बृहद्रूपः शिपिविष्टः प्रकाशनः ॥ ४२ ॥

२६५ सुभुजः जगत्की रक्षा करनेवाली अति सुन्दर भुजाओंवाले, २६६ दुर्धरः-ध्यानद्वारा कठिनतासे धारण किये जा सकनेवाले, २६७ वाग्मी-वेदमयी वाणीको उत्पन्न करनेवाले, २६८ महेन्द्रः-ईश्वरोंके भी ईश्वर, २६९ वसुदः-धन देनेवाले, २७० वसुः-धनरूप, २७१ नैकरूपः-अनेक रूपधारी, २७२ बृहद्रूपः-विश्वरूपधारी, २७३ शिपिविष्टः-सूर्यकिरणोंमें स्थित रहनेवाले, २७४ प्रकाशनः-सबको प्रकाशित करनेवाले ॥ ४२ ॥

ओजस्तेजोद्युतिधरः प्रकाशात्मा प्रतापनः ।
ऋद्धः स्पष्टाक्षरो मन्त्रश्चन्द्रांशुर्भास्करद्युतिः ॥ ४३ ॥

२७५ ओजस्तेजोद्युतिधरः-प्राण और बल, शूरवीरता आदि गुण तथा ज्ञानकी दीप्तिको धारण करनेवाले, २७६ प्रकाशात्मा-प्रकाशरूप, २७७ प्रतापनः-सूर्य आदि अपनी विभूतियोंसे विश्वको तप्त करनेवाले, २७८ ऋद्धः-धर्म, ज्ञान और वैराग्यादिसे सम्पन्न, २७९ स्पष्टाक्षरः-ओंकाररूप स्पष्ट अक्षरवाले, २८० मन्त्रः-ऋक्, साम और यजुके मन्त्रस्वरूप, २८१ चन्द्रांशुः-संसारतापसे संतप्तचित्त पुरुषोंको चन्द्रमाकी किरणोंके समान आह्लादित करनेवाले, २८२ भास्करद्युतिः-सूर्यके समान प्रकाशस्वरूप ॥ ४३ ॥

अमृतांशूद्भवो भानुः शशबिन्दुः सुरेश्वरः ।
औषधं जगतः सेतुः सत्यधर्मपराक्रमः ॥ ४४ ॥

२८३ अमृतांशूद्भवः-समुद्रमन्थन करते समय चन्द्रमाको उत्पन्न करनेवाले, २८४ भानुः-भासनेवाले, २८५ शशबिन्दुः-खरगोशके समान चिह्नवाले चन्द्रस्वरूप, २८६ सुरेश्वरः-देवताओंके ईश्वर, २८७ औषधम्-संसाररोगको मिटानेके लिये औषधरूप, २८८ जगतः सेतुः-संसार-सागरको पार करानेके लिये सेतुरूप, २८९ सत्यधर्मपराक्रमः-सत्यस्वरूप धर्म और पराक्रमवाले ॥ ४४ ॥

भूतभव्यभवन्नाथः पवनः पावनोऽनलः ।
कामहा कामकृत् कान्तः कामः कामप्रदः प्रभुः ॥ ४५ ॥

२९० भूतभव्यभवन्नाथः-भूत, भविष्य और वर्तमानके स्वामी, २९१ पवनः-वायुरूप, २९२ पावनः-जगत्को पवित्र करनेवाले, २९३ अनलः-अग्निस্বরূপ, २९४ कामहा-अपने भक्तजनोंके सकामभावको नष्ट करनेवाले, २९५ कामकृत्-भक्तोंकी कामनाओंको पूर्ण करनेवाले, २९६ कान्तः-कमनीयरूप, २९७ कामः-(क) ब्रह्मा, (अ) विष्णु, (म) महादेव—