महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1429, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रकाशित करनेवाले सूर्यरूप, ३३४ आदिकदेवः-सबके आदिकारण देव, ३३५ पुरंदरः-असुरोंके नगरोंका ध्वंस करनेवाले ॥ ४९ ॥ अशोकस्तारणस्तारः शूरः शौरिर्जनेश्वरः । अनुकूलः शतावर्तः पद्मी पद्मनिभेक्षणः ॥ ५० ॥ ३३६ अशोकः-सब प्रकारके शोकसे रहित, ३३७ तारणः-संसारसागरसे तारनेवाले, ३३८ तारः-जन्म-जरा मृत्युरूप भयसे तारनेवाले, ३३९ शूरः-पराक्रमी, ३४० शौरिः-शूरवीर श्रीवसुदेवजीके पुत्र, ३४१ जनेश्वरः-समस्त जीवोंके स्वामी, ३४२ अनुकूलः-आत्मारूप होनेसे सबके अनुकूल, ३४३ शतावर्तः-धर्मरक्षाके लिये सैकड़ों अवतार लेनेवाले, ३४४ पद्मी-अपने हाथमें कमल धारण करनेवाले, ३४५ पद्मनिभेक्षणः-कमलके समान कोमल दृष्टिवाले ॥ ५० ॥ पद्मनाभोऽरविन्दाक्षः पद्मगर्भः शरीरभृत् । महर्द्धिर्ऋद्धो वृद्धात्मा महाक्षो गरुडध्वजः ॥ ५१ ॥ ३४६ पद्मनाभः-हृदय-कमलके मध्य निवास करनेवाले, ३४७ अरविन्दाक्षः-कमलके समान आँखोंवाले, ३४८ पद्मगर्भः-हृदयकमलमें ध्यान करनेयोग्य, ३४९ शरीरभृत्-अन्नरूपसे सबके शरीरोंका भरण करनेवाले, ३५० महर्द्धिः-महान् विभूतिवाले, ३५१ ऋद्धः-सबमें बढ़े-चढ़े, ३५२ वृद्धात्मा-पुरातन स्वरूप, ३५३ महाक्षः-विशाल नेत्रोंवाले, ३५४ गरुडध्वजः-गरुडके चिह्नसे युक्त ध्वजावाले ॥ ५१ ॥ अतुलः शरभो भीमः समयज्ञो हविर्हरिः । सर्वलक्षणलक्षण्यो लक्ष्मीवान् समितिञ्जयः ॥ ५२ ॥ ३५५ अतुलः-तुलणारहित, ३५६ शरभः-शरीरोंको प्रत्यगात्मरूपसे प्रकाशित करनेवाले, ३५७ भीमः-जिससे पापियोंको भय हो ऐसे भयानक, ३५८ समयज्ञः-समभावरूप यज्ञसे सम्पन्न, ३५९ हविर्हरिः-यज्ञोंमें हविर्भागको और अपना स्मरण करनेवालोंके पापोंको हरण करनेवाले, ३६० सर्वलक्षणलक्षण्यः-समस्त लक्षणोंसे लक्षित होनेवाले, ३६१ लक्ष्मीवान्-अपने वक्षःस्थलमें लक्ष्मीजीको सदा बसानेवाले, ३६२ समितिञ्जयः संग्रामविजयी ॥ ५२ ॥ विक्षरो रोहितो मार्गो हेतुर्दामोदरः सहः । महीधरो महाभागो वेगवानमिताशनः ॥ ५३ ॥ ३६३ विक्षरः-नाशरहित, ३६४ रोहितः-मत्स्यविशेषका स्वरूप धारण करके अवतार लेनेवाले, ३६५ मार्गः-परमानन्दप्राप्तिके साधन-स्वरूप, ३६६ हेतुः-संसारके निमित्त और उपादान कारण, ३६७ दामोदरः-यशोदाजीद्वारा रस्सीसे बँधे हुए उदरवाले, ३६८ सहः-भक्तजनोंके अपराधोंको सहन करनेवाले, ३६९ महीधरः-पृथ्वीको धारण करनेवाले, ३७० महाभागः-महान् भाग्यशाली, ३७१ वेगवान्-तीव्रगतिवाले, ३७२ अमिताशनः-प्रलयकालमें सारे विश्वको भक्षण करनेवाले ॥ ५३ ॥