भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1453, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1453

धर्मज्ञ नरेश्वर! जो रात-दिन इस मन्त्रका जप करता है, वह पापोंसे लिप्त नहीं होता। वही मन्त्र मैं तुम्हें बता रहा हूँ, एकचित्त होकर सुनो ॥ ६ ॥
आयुष्मान् भवते चैव यं श्रुत्वा पार्थिवात्मज ।
पुरुषस्तु सुसिद्धार्थः प्रेत्य चेह च मोदते ॥ ७ ॥
राजकुमार! जो इस मन्त्रको सुनता है, वह पुरुष दीर्घजीवी तथा सफलमनोरथ होता है, इहलोक और परलोकमें भी आनन्द भोगता है ॥ ७ ॥
सेवितं सततं राजन् पुरा राजर्षिसत्तमैः ।
क्षत्रधर्मपरैर्नित्यं सत्यव्रतपरायणैः ॥ ८ ॥
राजन्! प्राचीनकालमें क्षत्रियधर्मका पालन करनेवाले और सदा सत्य व्रतके आचरणमें संलग्न रहनेवाले राजर्षिशिरोमणि इस मन्त्रका सदा ही जप किया करते थे ॥ ८ ॥
इदमाह्निकमव्यग्रं कुर्वद्भिर्नियतैः सदा ।
नृपैर्भरतशार्दूल प्राप्यते श्रीरनुत्तमा ॥ ९ ॥
भरतसिंह! जो राजा मन और इन्द्रियोंको वशमें करके शान्तिपूर्वक प्रतिदिन इस मन्त्रका जप करते हैं, उन्हें सर्वोत्तम सम्पत्ति प्राप्त होती है ॥ ९ ॥
नमो वसिष्ठाय महाव्रताय
पराशरं वेदनिधिं नमस्ये ।
नमोऽस्त्वनन्ताय महोरगाय
नमोऽस्तु सिद्धेभ्य इहाक्षयेभ्यः ॥ १० ॥
नमोऽस्त्वृषिभ्यः परमं परेषां
देवेषु देवं वरदं वराणाम् ।
सहस्रशीर्षाय नमः शिवाय
सहस्रनामाय जनार्दनाय ॥ ११ ॥
(यह मन्त्र इस प्रकार है—) महान् व्रतधारी वसिष्ठको नमस्कार है, वेदनिधि पराशरको नमस्कार है, विशाल सर्परूपधारी अनन्त (शेषनाग)-को नमस्कार है, अक्षय सिद्धगणको नमस्कार है, ऋषिवृन्दको नमस्कार है तथा परात्पर, देवाधिदेव, वरदाता परमेश्वरको नमस्कार है एवं सहस्र मस्तकवाले शिवको और सहस्रों नाम धारण करनेवाले भगवान् जनार्दनको नमस्कार है ॥ १०-११ ॥
अजैकपादहिर्बुध्न्यः पिनाकी चापराजितः ।
ऋतश्च पितृरूपश्च त्र्यम्बकश्च महेश्वरः ॥ १२ ॥
वृषाकपिश्च शम्भुश्च हवनोऽथेश्वरस्तथा ।
एकादशैते प्रथिता रुद्रास्त्रिभुवनेश्वराः ॥ १३ ॥
अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, पिनाकी, अपराजित, ऋत, पितृरूप त्र्यम्बक, महेश्वर, वृषाकपि, शम्भु, हवन और ईश्वर—ये ग्यारह रुद्र विख्यात हैं; जो तीनों लोकोंके स्वामी