भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1951, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1951

धनुषः पततस्तस्य सव्यसाचिकराद् विभो । बभूव सदृशं रूपं शक्रचापस्य भारत ॥ २३ ॥ प्रभो! भरतनन्दन! अर्जुनके हाथसे गिरते हुए उस धनुषका रूप इन्द्रधनुषके समान प्रतीत होता था ॥ २३ ॥ तस्मिन् निपतिते दिव्ये महाधनुषि पार्थिवः । जहास सस्वनं हासं धृतवर्मा महाहवे ॥ २४ ॥ उस दिव्य महाधनुषके गिर जानेपर महासमरमें खड़ा हुआ धृतवर्मा ठहाका मारकर जोर-जोरसे हँसने लगा ॥ २४ ॥ ततो रोषार्दितो जिष्णुः प्रमृज्य रुधिरं करात् । धनुरादत्त तद् दिव्यं शरवर्षैरवर्ष च ॥ २५ ॥ इससे अर्जुनका रोष बढ़ गया। उन्होंने हाथसे रक्त पोंछकर उस दिव्य धनुषको पुनः उठा लिया और धृतवर्मापर बाणोंकी वर्षा आरम्भ कर दी ॥ २५ ॥ ततो हलहलाशब्दो दिवस्पृगभवत् तदा । नानाविधानां भूतानां तत्कर्माणि प्रशंसताम् ॥ २६ ॥ फिर तो अर्जुनके उस पराक्रमकी प्रशंसा करते हुए नाना प्रकारके प्राणियोंका कोलाहल समूचे आकाशमें व्याप्त हो गया ॥ २६ ॥ ततः सम्प्रेक्ष्य संक्रुद्धं कालान्तकयमोपमम् । जिष्णुं त्रैगर्तका योधाः परीताः पर्यवारयन् ॥ २७ ॥ अर्जुनको काल, अन्तक और यमराजके समान कुपित हुआ देख त्रिगर्तदेशीय योद्धाओंने चारों ओरसे आकर उन्हें घेर लिया ॥ २७ ॥ अभिसृत्य परीप्सार्थं ततस्ते धृतवर्मणः । परिवव्रुर्गुडाकेशं तत्राक्रुद्ध्यद् धनंजयः ॥ २८ ॥ धृतवर्माकी रक्षाके लिये सहसा आक्रमण करके त्रिगर्तोंने गुडाकेश अर्जुनको जब सब ओरसे घेर लिया, तब उन्हें बड़ा क्रोध हुआ ॥ २८ ॥ ततो योधन् जघानाशु तेषां स दश चाष्ट च । महेन्द्रवज्रप्रतिमैरायसैर्बहुभिः शरैः ॥ २९ ॥ फिर तो उन्होंने इन्द्रके वज्रकी भाँति दुस्सह लौहनिर्मित बहुसंख्यक बाणोंद्वारा बात-की-बातमें उनके अठारह प्रमुख योद्धाओंको यमलोक पहुँचा दिया ॥ २९ ॥ तान् सम्प्रभग्नान् सम्प्रेक्ष्य त्वरमाणो धनंजयः । शरैराशीविषाकारैर्जघान स्वनवद्धसन् ॥ ३० ॥ तब तो त्रिगर्तोंमें भगदड़ मच गयी। उन्हें भागते देख अर्जुनने जोर-जोरसे हँसते हुए बड़ी उतावलीके साथ सर्पाकार बाणोंद्वारा उन सबको मारना आरम्भ किया ॥ ३० ॥ ते भग्नमनसः सर्वे त्रैगर्तकमहारथाः ।