महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकेशव! उस समय मैंने आकाशमें सहस्रों चन्द्रमा और सूर्य देखे। तदनन्तर मैं सम्पूर्ण जगत्के पालक महादेवजीकी स्तुति करने लगा ॥ २८६ १/२ ॥
उपमन्युरुवाच
नमो देवाधिदेवाय महादेवाय ते नमः ॥ २८७ ॥
शक्ररूपाय शक्राय शक्रवेषधराय च ।
नमस्ते वज्रहस्ताय पिङ्गलायारुणाय च ॥ २८८ ॥
उपमन्यु बोले—प्रभो! आप देवताओंके भी अधिदेवता हैं। आपको नमस्कार है। आप ही महान् देवता हैं, आपको नमस्कार है। इन्द्र आपके ही रूप हैं। आप ही साक्षात् इन्द्र हैं तथा आप इन्द्रका-सा वेश धारण करनेवाले हैं। इन्द्रके रूपमें आप ही अपने हाथमें वज्र लिये रहते हैं। आपका वर्ण पिंगल और अरुण है, आपको नमस्कार है ॥ २८७-२८८ ॥
पिनाकपाणये नित्यं शङ्खशूलधराय च ।
नमस्ते कृष्णवासाय कृष्णकुञ्चितमूर्धजे ॥ २८९ ॥
आपके हाथमें पिनाक शोभा पाता है। आप सदा शंख और त्रिशूल धारण करते हैं। आपके वस्त्र काले हैं तथा आप मस्तकपर काले घुँघराले केश धारण करते हैं, आपको नमस्कार है ॥ २८९ ॥
कृष्णाजिनोत्तरीयाय कृष्णाष्टमिरताय च ।
शुक्लवर्णाय शुक्लाय शुक्लाम्बरधराय च ॥ २९० ॥
काला मृगचर्म आपका दुपट्टा है। आप श्रीकृष्णमाष्टमीव्रतमें तत्पर रहते हैं। आपका वर्ण शुक्ल है। आप स्वरूपसे भी शुक्ल (शुद्ध) हैं तथा आप श्वेत वस्त्र धारण करते हैं। आपको नमस्कार है ॥ २९० ॥
शुक्लभस्मावलिप्ताय शुक्लकर्मरताय च ।
नमोऽस्तु रक्तवर्णाय रक्ताम्बरधराय च ॥ २९१ ॥
आप अपने सारे अंगोंमें श्वेत भस्म लपेटे रहते हैं। विशुद्ध कर्ममें अनुरक्त हैं। कभी-कभी आप रक्त वर्णके हो जाते हैं और लाल वस्त्र ही धारण कर लेते हैं। आपको नमस्कार है ॥ २९१ ॥
रक्तध्वजपताकाय रक्तस्रगनुलेपिने ।
नमोऽस्तु पीतवर्णाय पीताम्बरधराय च ॥ २९२ ॥
रक्ताम्बरधारी होनेपर आप अपनी ध्वजा-पताका भी लाल ही रखते हैं। लाल फूलोंकी माला पहनकर अपने श्रीअंगोंमें लाल चन्दनका ही लेप लगाते हैं। किसी समय आपकी अंगकान्ति पीले रंगकी हो जाती है। ऐसे समयमें आप पीताम्बर धारण करते हैं। आपको नमस्कार है ॥ २९२ ॥
नमोऽस्तूच्छ्रितच्छत्राय किरीटवरधारिणे ।