महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअर्धहारार्धकेयूर अर्धकुण्डलकर्णिने ।। २९३ ।। आपके मस्तकपर ऊँचा छत्र तना है। आप सुन्दर किरीट धारण करते हैं। अर्द्धनारीश्वररूपमें आपके आधे अंगमें ही हार, आधेमें ही केयूर और आधे अंगके ही कानमें कुण्डल शोभा पाता है। आपको नमस्कार है ।। २९३ ।।
नमः पवनवेगाय नमो देवाय वै नमः । सुरेन्द्राय मुनीन्द्राय महेन्द्राय नमोऽस्तु ते ।। २९४ ।। आप वायुके समान वेगशाली हैं। आपको नमस्कार है। आप ही मेरे आराध्यदेव हैं। आपको बारंबार नमस्कार है। आप ही सुरेन्द्र, मुनीन्द्र और महेन्द्र हैं। आपको नमस्कार है ।। २९४ ।।
नमः पद्मार्धमालाय उत्पलैर्मिश्रिताय च । अर्धचन्दनलिप्ताय अर्धस्रगनुलेपिने ।। २९५ ।। आप अपने आधे अंगको कमलोंकी मालासे अलंकृत करते हैं और आधेमें उत्पलोंसे विभूषित होते हैं। आधे अंगमें चन्दनका लेप लगाते हैं तो आधे शरीरमें फूलोंका गजरा और सुगन्धित अंगराग धारण करते हैं। ऐसे अर्द्धनारीश्वररूपमें आपको नमस्कार है ।। २९५ ।।
नम आदित्यवक्त्राय आदित्यनयनाय च । नम आदित्यवर्णाय आदित्यप्रतिमाय च ।। २९६ ।। आपके मुख सूर्यके समान तेजस्वी हैं। सूर्य आपके नेत्र हैं। आपकी अंगकान्ति भी सूर्यके ही समान है तथा आप अधिक सादृश्यके कारण सूर्यकी प्रतिमा-से जान पड़ते हैं ।। २९६ ।।
नमः सोमाय सौम्याय सौम्यवक्त्रधराय च । सौम्यरूपाय मुख्याय सौम्यदंष्ट्राविभूषिणे ।। २९७ ।। आप सोमस्वरूप हैं। आपकी आकृति बड़ी सौम्य है। आप सौम्य मुख धारण करते हैं। आपका रूप भी सौम्य है। आप प्रमुख देवता हैं और सौम्य दन्तावलीसे विभूषित होते हैं। आपको नमस्कार है ।। २९७ ।।
नमः श्यामाय गौराय अर्धपीतार्धपाण्डवे । नारीनरशरीराय स्त्रीपुंसाय नमोऽस्तु ते ।। २९८ ।। आप हरिहररूप होनेके कारण आधे शरीरसे साँवले और आधेसे गोरे हैं। आधे शरीरमें पीताम्बर धारण करते हैं और आधेमें श्वेत वस्त्र पहनते हैं। आपको नमस्कार है। आपके आधे शरीरमें नारीके अवयव हैं और आधेमें नरके। आप स्त्री-पुरुषरूप हैं। आपको नमस्कार है ।। २९८ ।।
नमो वृषभवाहाय गजेन्द्रगमनाय च । दुर्गमाय नमस्तुभ्यमगम्यगमनाय च ।। २९९ ।।