भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 208, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 208

नमो दिग्वाससे नित्यमधिवाससुवाससे । नमो जगन्निवासाय प्रतिपत्तिसुखाय च ॥ ३०६ ॥ आप दिगम्बर हैं। आपको नमस्कार है। आप सबके आवास-स्थान और सुन्दर वस्त्र धारण करनेवाले हैं। सम्पूर्ण जगत् आपमें ही निवास करता है। आपको सम्पूर्ण सिद्धियोंका सुख सुलभ है। आपको नमस्कार है ॥ ३०६ ॥

नित्यमुद्वद्धमुकुटे महाकेयूरधारिणे । सर्पकण्ठोपहाराय विचित्राभरणाय च ॥ ३०७ ॥ आप मस्तकपर सदा मुकुट बाँधे रहते हैं। भुजाओंमें विशाल केयूर धारण करते हैं। आपके कण्ठमें सर्पोंका हार शोभा पाता है तथा आप विचित्र आभूषणोंसे विभूषित होते हैं। आपको नमस्कार है ॥ ३०७ ॥

नमस्त्रिनेत्रनेत्राय सहस्रशतलोचने । स्त्रीपुंसाय नपुंसाय नमः सांख्याय योगिने ॥ ३०८ ॥ सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि—ये तीन नेत्ररूप होकर आपको त्रिनेत्रधारी बना देते हैं। आपके लाखों नेत्र हैं। आप स्त्री हैं, पुरुष हैं और नपुंसक हैं। आप ही सांख्यवेत्ता और योगी हैं। आपको नमस्कार है ॥ ३०८ ॥

शंयोरभिस्रवन्ताय अथर्वाय नमो नमः । नमः सर्वार्तिनाशाय नमः शोकहराय च ॥ ३०९ ॥ आप यज्ञपूरक ‘शंयु’ नामक देवताके प्रसादरूप हैं और अथर्ववेदस्वरूप हैं। आपको बारंबार नमस्कार है। जो सबकी पीड़ाका नाश करनेवाले और शोकहारी हैं, उन्हें नमस्कार है, नमस्कार है ॥ ३०९ ॥

नमो मेघनिनादाय बहुमायाधराय च । बीजक्षेत्राभिपालाय स्रष्टाराय नमो नमः ॥ ३१० ॥ जो मेघके समान गम्भीर नाद करनेवाले तथा बहुसंख्यक मायाओंके आधार हैं, जो बीज और क्षेत्रका पालन करते हैं और जगत्की सृष्टि करनेवाले हैं, उन भगवान् शिवको बारंबार नमस्कार है ॥ ३१० ॥

नमः सुरासुरेशाय विश्वेशाय नमो नमः । नमः पवनवेगाय नमः पवनरूपिणे ॥ ३११ ॥ आप देवताओं और असुरोंके स्वामी हैं। आपको नमस्कार है। आप सम्पूर्ण विश्वके ईश्वर हैं। आपको बारंबार नमस्कार है। आप वायुके समान वेगशाली तथा वायुरूप हैं। आपको नमस्कार है, नमस्कार है ॥ ३११ ॥

नमः काञ्चनमालाय गिरिमालाय वै नमः । नमः सुरारिमालाय चण्डवेगाय वै नमः ॥ ३१२ ॥