महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2218, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंहैं। आपको बारंबार नमस्कार है ।।
चतुर्मूर्ते चतुर्बाहो चतुर्व्यूह नमो नमः ।
लोकात्मँल्लोककृन्नाथ लोकावास नमो नमः ।।
‘आप चार रूप धारण करनेवाले, चार भुजाधारी और चतुर्व्यूहस्वरूप हैं। आपको बारंबार नमस्कार है। आप विश्वरूप, लोकेश्वरोंके अधीश्वर तथा सम्पूर्ण लोकोंके निवासस्थान हैं, आपको मेरा पुनः-पुनः प्रणाम है ।।
सृष्टिसंहारकर्त्रे ते नरसिंह नमो नमः ।
भक्तप्रिय नमस्तेऽस्तु कृष्ण नाथ नमो नमः ।।
‘नरसिंह! आप ही इस जगत्की सृष्टि और संहार करनेवाले हैं आपको बारंबार नमस्कार है। भक्तोंके प्रियतम श्रीकृष्ण! स्वामिन्! आपको बारंबार प्रणाम है ।।
लोकप्रिय नमस्तेऽस्तु भक्तवत्सल ते नमः ।
ब्रह्मावास नमस्तेऽस्तु ब्रह्मनाथ नमो नमः ।।
‘आप सम्पूर्ण लोकोंके प्रिय हैं। आपको नमस्कार है। भक्तवत्सल! आपको नमस्कार है। आप ब्रह्माके निवासस्थान और उनके स्वामी हैं। आपको प्रणाम है ।।
रुद्ररूप नमस्तेऽस्तु रुद्रकर्मरताय ते ।
पञ्चयज्ञ नमस्तेऽस्तु सर्वयज्ञ नमो नमः ।।
रुद्ररूप! आपको नमस्कार है। रौद्र कर्ममें रत रहनेवाले आपको नमस्कार है। पञ्चयज्ञरूप! आपको नमस्कार है। सर्वयज्ञस्वरूप! आपको नमस्कार है ।।
कृष्ण प्रिय नमस्तेऽस्तु कृष्ण नाथ नमो नमः ।
योगिप्रिय नमस्तेऽस्तु योगिनाथ नमो नमः ।।
‘प्यारे श्रीकृष्ण! आपको प्रणाम है। स्वामिन्! श्रीकृष्ण! आपको बारंबार नमस्कार है। योगियोंके प्रिय! आपको नमस्कार है। योगियोंके स्वामी! आपको बार-बार प्रणाम है ।।
हयवक्त्र नमस्तेऽस्तु चक्रपाणे नमो नमः ।
पञ्चभूत नमस्तेऽस्तु पञ्चायुध नमो नमः ।।
‘हयग्रीव! आपको नमस्कार है। चक्रपाणे! आपको बारंबार नमस्कार है। पञ्चभूतस्वरूप! आपको नमस्कार है। आप पाँच आयुध धारण करनेवाले हैं; आपको नमस्कार है’ ।।
वैशम्पायन उवाच
भक्तिगद्गदया वाचा स्तुवत्येवं युधिष्ठिरे ।
गृहीत्वा केशवो हस्ते प्रीतात्मा तं न्यवारयत् ।।
**वैशम्पायनजी कहते हैं—**राजन्! धर्मराज युधिष्ठिर जब भक्तिगद्गद वाणीसे इस प्रकार भगवान्की स्तुति करने लगे, तब श्रीकृष्णने प्रसन्नतापूर्वक धर्मराजका हाथ पकड़कर