महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 247, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंजटाजूटधारी, १३७ ऊर्ध्वरेताः—अखण्डित ब्रह्मचर्यवाले, १३८ ऊर्ध्वलिङ्गः—, १३९ ऊर्ध्वशायी—आकाशमें शयन करनेवाले, १४० नभः स्थलः—आकाश जिनका वासस्थान है वे ।।
त्रिजटी चीरवासाश्च रुद्रः सेनापतिर्विभुः । अहश्चरो नक्तंचरस्तिग्ममन्युः सुवर्चसः ।। ४७ ।।
१४१ त्रिजटी—तीन जटा धारण करनेवाले, १४२ चीरवासाः—वल्कल वस्त्र पहननेवाले, १४३ रुद्रः—दुःखको दूर भगानेवाले, १४४ सेनापतिः—सेनानायक, १४५ विभुः—सर्वव्यापी, १४६ अहश्चरः—दिनमें विचरनेवाले, १४७ नक्तंचरः—रातमें विचरनेवाले, १४८ तिग्ममन्युः—तीखे क्रोधवाले, १४९ सुवर्चसः—सुन्दर तेजवाले ।। ४७ ।।
गजहा दैत्यहा कालो लोकधाता गुणाकरः । सिंहशार्दूलरूपश्च आर्द्रचर्माम्बरावृतः ।। ४८ ।।
१५० गजहा—गजरूपधारी महान् असुरको मारनेवाले, १५१ दैत्यहा—अन्धक आदि दैत्योंका वध करनेवाले, १५२ कालः—मृत्यु अथवा संवत्सर आदि समय, १५३ लोकधाता—समस्त जगत्का धारण-पोषण करनेवाले, १५४ गुणाकरः—सद्गुणोंकी खान, १५५ सिंहशार्दूलरूपः—सिंह-व्याघ्र आदिका रूप धारण करनेवाले, १५६ आर्द्रचर्माम्बरावृतः—गजासुरके गीले चर्मको ही वस्त्र बनाकर उससे अपने-आपको आच्छादित करनेवाले ।। ४८ ।।
कालयोगी महानादः सर्वकामश्चतुष्पथः । निशाचरः प्रेतचारी भूतचारी महेश्वरः ।। ४९ ।।
१५७ कालयोगी—कालको भी योगबलसे जीतनेवाले, १५८ महानादः—अनाहत ध्वनिरूप, १५९ सर्वकामः—सम्पूर्ण कामनाओंसे सम्पन्न, १६० चतुष्पथः—जिनकी प्राप्तिके ज्ञानयोग, भक्तियोग, कर्मयोग और अष्टाङ्गयोग—ये चार मार्ग हैं वे महादेव, १६१ निशाचरः—रात्रिके समय विचरनेवाले, १६२ प्रेतचारी—प्रेतोंके साथ विचरण करनेवाले, १६३ भूतचारी—भूतोंके साथ विचरनेवाले, १६४ महेश्वरः—इन्द्र आदि लोकेश्वरोंसे भी महान् ।।
बहुभूतो बहुधरः स्वर्भानुरमितो गतिः । नृत्यप्रियो नित्यनर्तो नर्तकः सर्वलालसः ।। ५० ।।
१६५ बहुभूतः—सृष्टिकालमें एकसे अनेक होनेवाले, १६६ बहुधरः—बहुतोंको धारण करनेवाले, १६७ स्वर्भानुः—, १६८ अमितः—अनन्त, १६९ गतिः—भक्तों और मुक्तात्माओंके प्राप्त होने योग्य, १७० नृत्यप्रियः—ताण्डव नृत्य जिन्हें प्रिय है वे शिव, १७१ नित्यनर्तः—निरन्तर नृत्य करनेवाले, १७२ नर्तकः—नाचने-नचानेवाले, १७३ सर्वलालसः—सबपर प्रेम रखनेवाले ।। ५० ।।