भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 2549

कर्णपर्वण्यपि तथा भोजनं सार्वकामिकम् ।। ६४ ।।
विप्रेभ्यः संस्कृतं सम्यग् दद्यात् संयतमानसः ।
कर्णपर्वमें भी ब्राह्मणोंको अच्छे ढंगसे तैयार किया हुआ सबकी रुचिके अनुकूल उत्तम भोजन दे और अपने मनको वशमें रखे ।। ६४ १/२ ।।

शल्यपर्वणि राजेन्द्र मोदकैः सगुडौदनैः ।। ६५ ।।
अपूपैस्तर्पणैश्चैव सर्वमन्नं प्रदापयेत् ।
राजेन्द्र! शल्यपर्वमें मिठाई, गुड़, भात, पूआ तथा तृप्तिकारक फल आदिके साथ सब प्रकारके उत्तम अन्न दान करे ।। ६५ १/२ ।।

गदापर्वण्यपि तथा मुद्ग‌मिश्रं प्रदापयेत् ।। ६६ ।।
स्त्रीपर्वणि तथा रत्नैस्तर्पयेत्तु द्विजोत्तमान् ।
गदापर्वमें भी मूँग मिलाये हुए चावलका दान करे। स्त्रीपर्वमें रत्नोंद्वारा श्रेष्ठ ब्राह्मणोंको तृप्त करे ।।

घृतौदनं पुरस्ताच्च ऐषीके दापयेत् पुनः ।। ६७ ।।
ततः सर्वगुणोपेतमन्नं दद्यात् सुसंस्कृतम् ।
ऐषीकपर्वमें पहले घी मिलाया हुआ भात जिमाये। फिर अच्छी तरह संस्कार किये हुए सर्वगुणसम्पन्न अन्नका दान करे ।। ६७ १/२ ।।

शान्तिपर्वण्यपि तथा हविष्यं भोजयेद् द्विजान् ।। ६८ ।।
आश्वमेधिकमासाद्य भोजनं सार्वकामिकम् ।
शान्तिपर्वमें भी ब्राह्मणोंको हविष्य भोजन कराये। आश्वमेधिकपर्वमें पहुँचनेपर सबकी रुचिके अनुकूल उत्तम भोजन दे ।। ६८ १/२ ।।

तथाऽऽश्रमनिवासे तु हविष्यं भोजयेद् द्विजान् ।। ६९ ।।
मौसले सार्वगुणीकं गन्धमाल्यानुलेपनम् ।
आश्रमवासिकपर्वमें ब्राह्मणोंको हविष्य भोजन कराये। मौसलपर्वमें सर्वगुणसम्पन्न अन्न, चन्दन, माला और अनुलेपनका दान करे ।। ६९ १/२ ।।

महाप्रस्थानिके तद्वत् सर्वकामगुणान्वितम् ।। ७० ।।
स्वर्गपर्वण्यपि तथा हविष्यं भोजयेद् द्विजान् ।
इसी प्रकार महाप्रस्थानिकपर्वमें भी समस्त वाञ्छनीय गुणोंसे युक्त अन्न आदिका दान करे। स्वर्गारोहणपर्वमें भी ब्राह्मणोंको हविष्य खिलाये ।। ७० १/२ ।।

हरिवंशसमाप्तौ तु सहस्रं भोजयेद् द्विजान् ।। ७१ ।।
गामेकां निष्कसंयुक्तां ब्राह्मणाय निवेदयेत् ।
हरिवंशकी समाप्ति होनेपर एक हजार ब्राह्मणोंको भोजन कराये तथा स्वर्णमुद्रासहित एक गौ ब्राह्मणको दान दे ।। ७१ १/२ ।।