महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ
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तयोस्तु प्रेक्षतोरेव भार्गवाणां कुलोद्वहः । अन्तर्हितोऽभूद् राजेन्द्र ततो राजापतत् क्षितौ ॥ ३८ ॥ राजेन्द्र! वे भृगुकुलशिरोमणि राजा-रानीके देखते-देखते वहाँसे अन्तर्धान हो गये। इससे अत्यन्त दुःखी हो राजा पृथ्वीपर गिर पड़े ॥ ३८ ॥ स मुहूर्तं समाश्वस्य सह देव्या महाद्युतिः । पुनरन्वेषणे यत्नमकरोत् परमं तदा ॥ ३९ ॥ दो घड़ीमें किसी तरह अपनेको सँभालकर वे महातेजस्वी राजा उठे और महारानीको साथ लेकर पुनः मुनिको ढूँढ़नेका महान् प्रयत्न करने लगे ॥ ३९ ॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि च्यवनकुशिकसंवादे द्विपञ्चाशत्तमोऽध्यायः ॥ ५२ ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें च्यवन और कुशिकका संवादविषयक बावनवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ५२ ॥