महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 529, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंदर्शयामास कुशिकं सभार्यं कुरुनन्दन ।। १४ ।।
कुरुनन्दन! तदनन्तर शक्तिशाली भगवान् च्यवन मुनि पत्नीसहित राजा कुशिकको स्नान करके सिंहासनपर बैठे दिखायी दिये ।। १४ ।।
संहृष्टवदनो राजा सभार्यः कुशिको मुनिम् ।
सिद्धमन्नमिति प्रह्वो निर्विकारो न्यवेदयत् ।। १५ ।।
उन्हें देखते ही पत्नीसहित राजाका मुख प्रसन्नतासे खिल उठा। उन्होंने निर्विकारभावसे मुनिके पास जाकर विनयपूर्वक यह निवेदन किया कि 'भोजन तैयार है' ।। १५ ।।
आनीयतामिति मुनिस्तं चोवाच नराधिपम् ।
स राजा समुपाजह्रे तदन्नं सह भार्यया ।। १६ ।।
तब मुनिने राजासे कहा—'ले आओ।' आज्ञा पाकर पत्नीसहित नरेशने मुनिके सामने भोजन-सामग्री प्रस्तुत की ।। १६ ।।
मांसप्रकारान् विविधान् शाकानि विविधानि च ।
वेसवारविकारांश्च पानकानि लघूनि च ।। १७ ।।
रसालापूपकांश्चित्रान् मोदकानथ खाण्डवान् ।
रसान् नानाप्रकारांश्च वन्यं च मुनिभोजनम् ।। १८ ।।
फलानि च विचित्राणि राजभोज्यानि भूरिशः ।
बदरेङ्गुदकाश्मर्यभल्लातकफलानि च ।। १९ ।।
गृहस्थानां च यद् भोज्यं यच्चापि वनवासिनाम् ।
सर्वमाहारयामास राजा शापभयात् ततः ।। २० ।।
नाना प्रकारके फलोंके गूदे, भाँति-भाँतिके साग, अनेक प्रकारके व्यंजन, हलके पेय पदार्थ, स्वादिष्ट पूए, विचित्र मोदक (लड्डू), खाँड, नाना प्रकारके रस, मुनियोंके खानेयोग्य जंगली कंद-मूल, विचित्र फल, राजाओंके उपभोगमें आनेवाले अनेक प्रकारके पदार्थ, बेर, इंगुद, काश्मर्य, भल्लातक फल तथा गृहस्थों और वानप्रस्थोंके खाद्य पदार्थ—सब कुछ राजाने शापके डरसे मँगाकर प्रस्तुत कर दिया था ।। १७—२० ।।
अथ सर्वमुपन्यस्तमग्रतश्च्यवनस्य तत् ।
ततः सर्वं समानीय तच्च शय्यासनं मुनिः ।। २१ ।।
वस्त्रैः शुभैरवच्छाद्य भोजनोपस्करैः सह ।
सर्वमादीपयामास च्यवनो भृगुनन्दनः ।। २२ ।।
यह सब सामग्री च्यवन मुनिके आगे परोसकर रखी गयी। मुनिने वह सब लेकर उसको तथा शय्या और आसनको भी सुन्दर वस्त्रोंसे ढक दिया। इसके बाद भृगुनन्दन च्यवनने भोजन-सामग्रीके साथ उन वस्त्रोंमें भी आग लगा दी ।। २१-२२ ।।
न च तौ चक्रतुः क्रोधं दम्पती सुमहामती ।
तयोः सम्प्रेक्षतोरेव पुनरन्तर्हितोऽभवत् ।। २३ ।।