महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 774, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंपीढ़ियोंसे श्रोत्रिय (वेदपाठी) है, वह भी पंक्तिपावन है ॥ २७ ॥ ऋतुकालाभिगामी च धर्मपत्नीषु यः सदा । वेदविद्याव्रतस्नातो विप्रः पंक्तिं पुनात्युत ॥ २८ ॥ जो अपनी धर्मपत्नियोंके साथ सदा ऋतुकालमें ही समागम करता है, वेद और विद्याके व्रतमें स्नातक हो चुका है, वह ब्राह्मण-पंक्तिको पवित्र कर देता है ॥ २८ ॥ अथर्वशिरसोऽध्येता ब्रह्मचारी यतव्रतः । सत्यवादी धर्मशीलः स्वकर्मनिरतश्च सः ॥ २९ ॥ जो अथर्ववेदके ज्ञाता, ब्रह्मचारी, नियमपूर्वक व्रतका पालन करनेवाले, सत्यवादी, धर्मशील और अपने कर्तव्य-कर्ममें तत्पर हैं, वे पुरुष पंक्तिपावन हैं ॥ २९ ॥ ये च पुण्येषु तीर्थेषु अभिषेककृतश्रमाः । मखेषु च समन्त्रेषु भवन्त्यवभृथप्लुताः ॥ ३० ॥ अक्रोधना ह्यचपलाः क्षान्ता दान्ता जितेन्द्रियाः । सर्वभूतहिता ये च श्राद्धेष्वेतान् निमन्त्रयेत् ॥ ३१ ॥ जिन्होंने पुण्य तीर्थोंमें गोता लगानेके लिये श्रम—प्रयत्न किया है, वेदमन्त्रोंके उच्चारणपूर्वक अनेकों यज्ञोंका अनुष्ठान करके अवभृथ-स्नान किया है; जो क्रोधरहित, चपलातारहित, क्षमाशील, मनको वशमें रखनेवाले, जितेन्द्रिय और सम्पूर्ण प्राणियोंके हितैषी हैं, उन्हीं ब्राह्मणोंको श्राद्धमें निमन्त्रित करना चाहिये ॥ एतेषु दत्तमक्षय्यमेते वै पंक्तिपावनाः । इमे परे महाभागा विज्ञेयाः पंक्तिपावनाः ॥ ३२ ॥ क्योंकि ये पंक्तिपावन हैं; अतः इन्हें दिया हुआ दान अक्षय होता है। इनके सिवा दूसरे भी महान् भाग्यशाली पंक्तिपावन ब्राह्मण हैं, उन्हें इस प्रकार जानना चाहिये ॥ ३२ ॥ यतयो मोक्षधर्मज्ञा योगाः सुचरितव्रताः । (पाञ्चरात्रविदो मुख्यास्तथा भागवताः परे । वैखानसाः कुलश्रेष्ठा वैदिकाचारचारिणः ॥) ये चेतिहासं प्रयताः श्रावयन्ति द्विजोत्तमान् ॥ ३३ ॥ ये च भाष्यविदः केचिद् ये च व्याकरणे रताः । अधीयते पुराणं ये धर्मशास्त्राण्यथापि च ॥ ३४ ॥ अधीत्य च यथान्यायं विधिवत् तस्य कारिणः । उपपन्नो गुरुकुले सत्यवादी सहस्रशः ॥ ३५ ॥ अग्र्याः सर्वेषु वेदेषु सर्वप्रवचनेषु च । यावदेते प्रपश्यन्ति पंक्त्यास्तावत्पुनन्त्युत ॥ ३६ ॥ जो मोक्ष-धर्मका ज्ञान रखनेवाले संयमी और उत्तम प्रकारसे व्रतका आचरण करनेवाले योगी हैं, पांचरात्र आगमके जाननेवाले श्रेष्ठ पुरुष हैं, परम भागवत हैं, वानप्रस्थ-धर्मका