महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 800, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ें**विश्वामित्रने कहा—**हमलोगोंका भूखके मारे सनातन शास्त्र विस्मृत हो गया है और शास्त्रोक्त धर्म भी क्षीण हो चला है। ऐसी दशा इसकी नहीं है तथा यह आलसी, केवल पेटकी भूख बुझानेमें ही लगा हुआ और मूर्ख है। इसीलिये यह कुत्तेके साथ मोटा हो गया है ॥ ६३ ॥
जमदग्निरुवाच
नैतस्येह यथास्माकं भक्तमिन्धनमेव च ।
संचिन्त्यं वार्षिकं चित्ते तेन पीवाञ्छुना सह ॥ ६४ ॥
**जमदग्नि बोले—**हमारी तरह इसके मनमें वर्षभरके लिये भोजन और ईंधन जुटानेकी चिन्ता नहीं है, इसीलिये कुत्तेके साथ मोटा हो गया है ॥ ६४ ॥
कश्यप उवाच
नैतस्येह यथास्माकं चत्वारश्च सहोदराः ।
देहि देहीति भिक्षन्ति तेन पीवाञ्छुना सह ॥ ६५ ॥
**कश्यपने कहा—**हमलोगोंके चार भाई हमसे प्रतिदिन ‘भोजन दो, भोजन दो’ कहकर अन्न माँगते हैं, अर्थात् हमलोगोंको एक भारी कुटुम्बके भोजन-वस्त्रकी चिन्ता करनी पड़ती है। इस संन्यासीको यह सब चिन्ता नहीं है। अतः यह कुत्तेके साथ मोटा है ॥ ६५ ॥
भरद्वाज उवाच
नैतस्येह यथास्माकं ब्रह्मबन्धोरचेतसः ।
शोको भार्यापवादेन तेन पीवाञ्छुना सह ॥ ६६ ॥
**भरद्वाज बोले—**इस विवेकशून्य ब्राह्मणबन्धुको हमलोगोंकी तरह अपनी स्त्रीके कलंकित होनेका शोक नहीं है। इसीलिये यह कुत्तेके साथ मोटा हो गया है ॥
गौतम उवाच
नैतस्येह यथास्माकं त्रिकौशेयं च रांकवम् ।
एकैकं वै त्रिवर्षीयं तेन पीवाञ्छुना सह ॥ ६७ ॥
**गौतम बोले—**हमलोगोंकी तरह इसे तीन-तीन वर्षोंतक कुशकी रस्सीकी बनी हुई तीन लरवाली मेखला और मृगचर्म धारण करके नहीं रहना पड़ता है। इसीलिये यह कुत्तेके साथ मोटा हो गया है ॥ ६७ ॥
भीष्म उवाच
अथ दृष्ट्वा परिव्राट् स तान् महर्षीन् शुना सह ।
अभिगम्य यथान्यायं पाणिस্পর্শमथाचरत् ॥ ६८ ॥