भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 811, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 811

जीवतो वै गुरून् भृत्यान् भरन्त्वस्य परे जनाः ।
अगतिर्बहुपुत्रः स्याद् बिसस्तैन्यं करोति यः ॥ १२४ ॥
**विश्वामित्र बोले—**जो इन मृणालोंको चुरा ले गया हो, जिस पुरुषके जीवित रहनेपर उसके गुरु और माता तथा पिताका दूसरे पुरुष पोषण करें उसको और जिसकी कुगति हुई हो तथा जिसके बहुत-से पुत्र हों उसको जो पाप लगता है वह पाप उसे लगे ॥ १२४ ॥

अशुचिर्ब्रह्मकूतोऽस्तु ऋद्ध्या चैवाप्यहंकृतः ।
कर्षको मत्सरी चास्तु बिसस्तैन्यं करोति यः ॥ १२५ ॥
जिसने मृणालोंका अपहरण किया हो, उसे अपवित्र रहनेका, वेदको मिथ्या माननेका, धनका घमंड करनेका, ब्राह्मण होकर खेत जोतनेका और दूसरोंसे डाह रखनेका पाप लगे ॥ १२५ ॥

वर्षाचरोऽस्तु भृतको राज्ञश्चास्तु पुरोहितः ।
अयाज्यस्य भवेद्ऋत्विग् बिसस्तैन्यं करोति यः ॥ १२६ ॥
जिसने मृणाल चुराये हों, उसे वर्षाकालमें परदेशकी यात्रा करनेका, ब्राह्मण होकर वेतन लेकर काम करनेका, राजाके पुरोहित तथा यज्ञके अनधिकारीसे भी यज्ञ करानेका पाप लगे ॥ १२६ ॥

अरुन्धत्युवाच

नित्यं परिभवेच्छ्वश्रूं भर्तुर्भवतु दुर्मनाः ।
एका स्वादु समाश्नातु बिसस्तैन्यं करोति या ॥ १२७ ॥
**अरुन्धती बोलीं—**जो स्त्री मृणालोंकी चोरी करती हो उसे प्रतिदिन सासका तिरस्कार करनेका, अपने पतिका दिल दुखानेका और अकेली ही स्वादिष्ट वस्तुएँ खानेका पाप लगे ॥ १२७ ॥

ज्ञातीनां गृहमध्यस्था सक्तूनत्तु दिनक्षये ।
अभोग्या वीरसूरस्तु बिसस्तैन्यं करोति या ॥ १२८ ॥
जिसने मृणालोंकी चोरी की हो, उस स्त्रीको कुटुम्बीजनोंका अपमान करके घरमें रहनेका, दिन बीत जानेपर सत्तू खानेका, कलंकिनी होनेके कारण पतिके उपभोगमें न आनेका और ब्राह्मणी होकर भी क्षत्राणियोंके समान उग्र स्वभाववाले वीर पुत्रकी जननी होनेका पाप लगे ॥ १२८ ॥

गण्डोवाच

अनृतं भाषतु सदा बन्धुभिश्च विरुध्यतु ।
ददातु कन्यां शुल्केन बिसस्तैन्यं करोति या ॥ १२९ ॥
**गण्डा बोली—**जिस स्त्रीने मृणालकी चोरी की हो उसे सदा झूठ बोलनेका, भाई-बन्धुओंसे लड़ने और विरोध करने और शुल्क लेकर कन्यादान करनेका पाप लगे ॥