भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 821, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 821

नारदजीने कहा—जिसने आपके कमलोंका अपहरण किया हो, वह देहरूपी घरको ही आत्मा समझे। मर्यादाका उल्लंघन करके शास्त्र पढ़े। स्वरहीन पदका उच्चारण करे और गुरुजनोंका अपमान करता रहे, अर्थात् उपर्युक्त पापोंका भागी बने ॥ ३० ॥

नाभाग उवाच

अनृतं भाषतु सदा सद्भिश्चैव विरुध्यतु ।
शुल्केन तु ददत्कन्यां यस्ते हरति पुष्करम् ॥ ३१ ॥
नाभाग बोले—जिसने आपके कमल चुराये हों, उसे सदा झूठ बोलनेका, संतोंके साथ विरोध करनेका और कीमत लेकर कन्या बेचनेका पाप लगे ॥ ३१ ॥

कविरुवाच

पद्भ्यां स गां ताडयतु सूर्यं च प्रतिमेहतु ।
शरणागतं संत्यजतु यस्ते हरति पुष्करम् ॥ ३२ ॥
कविने कहा—जिसने आपका कमल लिया हो, उसे गौको लात मारनेका, सूर्यकी ओर मुँह करके पेशाब करनेका और शरणागतको त्याग देनेका पाप लगे ॥ ३२ ॥

विश्वामित्र उवाच

करोतु भृतकोऽवर्षां राज्ञश्चास्तु पुरोहितः ।
ऋत्विगस्तु ह्ययाज्यस्य यस्ते हरति पुष्करम् ॥ ३३ ॥
विश्वामित्र बोले—जो आपका कमल चुरा ले गया हो, वह वैश्यका भृत्य होकर उसीके खेतमें वर्षा होनेमें बाधा उपस्थित करे। राजाका पुरोहित हो और यज्ञके अनधिकारीका यज्ञ करानेके लिये ऋत्विक् बने, अर्थात् इन पापोंके फलका भागी हो ॥ ३३ ॥

पर्वत उवाच

ग्रामे चाधिकृतः सोऽस्तु खरयानेन गच्छतु ।
शुनः कर्षतु वृत्त्यर्थे यस्ते हरति पुष्करम् ॥ ३४ ॥
पर्वतने कहा—जो आपका कमल ले गया हो, वह गाँवका मुखिया हो जाय, गधेकी सवारीपर चले तथा पेट भरनेके लिये कुत्तोंको साथ लेकर शिकार खेले ॥

भरद्वाज उवाच

सर्वपापसमादानं नृशंसे चानृते च यत् ।
तत् तस्यास्तु सदा पापं यस्ते हरति पुष्करम् ॥ ३५ ॥
भरद्वाजने कहा—जिसने आपके कमलोंकी चोरी की हो, उस पापीको निर्दयी और असत्यवादी मनुष्योंमें रहनेवाला सारा-का-सारा पाप सदा ही प्राप्त होता रहे ॥ ३५ ॥

अष्टक उवाच