भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 847, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 847

स्थावरेषु दयां कुर्याज्जंगमेषु च प्राणिषु । यथाऽऽत्मनि तथान्येषु समां दृष्टिं निपातयेत् ॥ जो क्रोधी हो, उससे किसी वस्तुकी याचना न करे। जो ज्ञानसे द्वेष रखता हो, उससे भी कोई वस्तु न माँगे। स्थावर और जंगम सभी प्राणियोंपर दया करे। जैसे अपने ऊपर उसी प्रकार दूसरोंपर समतापूर्ण दृष्टि डाले ॥ पुण्यतीर्थानुसेवी च नदीनां पुलिनाश्रयः । शून्यागारनिकेतश्च वनवृक्षगुहाशयः ॥ अरण्यानुचरो नित्यं वेदारण्यनिकेतनः । एकरात्रं द्विरात्रं वा न क्वचित् सज्जते द्विजः ॥ संन्यासी पुण्यतीर्थोंका निरन्तर सेवन करे, नदियोंके तटपर कुटी बनाकर रहे। अथवा सूने घरमें डेरा डाले। वनमें वृक्षोंके नीचे अथवा पर्वतोंकी गुफाओंमें निवास करे। सदा वनमें विचरण करे। वेदरूपी वनका आश्रय ले, किसी भी स्थानमें एक रात या दो रातसे अधिक न रहे। कहीं भी आसक्त न हो ॥ शीर्णपर्णपुटे वापि वन्ये चरति भिक्षुकः । न भोगार्थमनुप्रेत्य यात्रामात्रं समश्नुते ॥ संन्यासी जंगली फल-मूल अथवा सूखे पत्तेका आहार करे। वह भोगके लिये नहीं, शरीरयात्राके निर्वाहके लिये भोजन करे ॥ धर्मलब्धं समश्नाति न कामान् किंचिदश्नुते । युगमात्रदृग्ध्वानं क्रोशादूर्ध्वं न गच्छति ॥ वह धर्मतः प्राप्त अन्नका ही भोजन करे। कामना-पूर्वक कुछ भी न खाय। रास्ता चलते समय वह दो हाथ आगेतककी भूमिपर ही दृष्टि रखे और एक दिनमें एक कोससे अधिक न चले ॥ समो मानापमानाभ्यां समलोष्टाश्मकाञ्चनः । सर्वभूताभयकरस्तथैवाभयदक्षिणः ॥ मान हो या अपमान—वह दोनों अवस्थाओंमें समान भावसे रहे। मिट्टीके ढेले, पत्थर और सुवर्णको एक समान समझे। समस्त प्राणियोंको निर्भय करे और सबको अभयकी दक्षिणा दे ॥ निर्द्वन्द्वो निर्ममस्कारो निरानन्दपरिग्रहः । निर्ममो निरहंकारः सर्वभूतनिराश्रयः ॥ शीत-उष्ण आदि द्वन्द्वोंसे निर्विकार रहे, किसीको नमस्कार न करे। सांसारिक सुख और परिग्रहसे दूर रहे। ममता और अहंकारको त्याग दे। समस्त प्राणियोंमेंसे किसीके भी आश्रित न रहे ॥ परिसंख्यानतत्त्वज्ञस्तथा सत्यरतिः सदा ।

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