भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 985, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 985

जो पुरुष राजाके टुकड़े खाकर पलता हुआ भी मोहवश उसके शत्रुओंकी सेवा करता है, वह मरनेके बाद वानर होता है ।। ६४ ।।

वानरो दश वर्षाणि पञ्च वर्षाणि मूषिकः ।
श्वाथ भूत्वा तु षण्मासांस्ततो जायति मानुषः ।। ६५ ।।
दस वर्षोंतक वानर, पाँच वर्षोंतक चूहा और छः महीनोंतक कुत्ता होकर वह मनुष्यका जन्म पाता है ।।

न्यासापहर्ता तु नरो यमस्य विषयं गतः ।
संसाराणां शतं गत्वा कृमियोनौ प्रजायते ।। ६६ ।।
दूसरोंकी धरोहर हड़प लेनेवाला मनुष्य यमलोकमें जाता और क्रमशः सौ योनियोंमें भ्रमण करके अन्तमें कीड़ा होता है ।। ६६ ।।

तत्र जीवति वर्षाणि दश पञ्च च भारत ।
दुष्कृतस्य क्षयं कृत्वा ततो जायति मानुषः ।। ६७ ।।
भारत! कीड़ेकी योनिमें वह पंद्रह वर्षोंतक जीवित रहता है और अपने पापोंका क्षय करके अन्तमें मनुष्य-योनिमें जन्म लेता है ।। ६७ ।।

असूयको नरश्चापि मृतो जायति शार्ङ्गकः ।
विश्वासहर्ता तु नरो मीनो जायति दुर्मतिः ।। ६८ ।।
दूसरोंके दोष ढूँढ़नेवाला मनुष्य हरिणकी योनिमें जन्म लेता है तथा जो अपनी खोटी बुद्धिके कारण किसीके साथ विश्वासघात करता है, वह मनुष्य मछली होता है ।। ६८ ।।

भूत्वा मीनोऽष्ट वर्षाणि मृतो जायति भारत ।
मृगस्तु चतुरो मासांस्ततश्छागः प्रजायते ।। ६९ ।।
भारत! आठ वर्षोंतक मछली रहकर मरनेके बाद वह चार मासतक मृग होता है। उसके बाद बकरेकी योनिमें जन्म लेता है ।। ६९ ।।

छागस्तु निधनं प्राप्य पूर्णे संवत्सरे ततः ।
कीटः संजायते जन्तुस्ततो जायति मानुषः ।। ७० ।।
बकरा पूरे एक वर्षपर मृत्युको प्राप्त होनेके पश्चात् कीड़ा होता है। उसके बाद उस जीवको मनुष्यका जन्म मिलता है ।। ७० ।।

धान्यान् यवांस्तिलान् माषान् कुलत्थान् सर्षपांश्चणान् ।
कलापानथ मुद्गांश्च गोधूमानतसींस्तथा ।। ७१ ।।
सस्यस्यान्यस्य हर्ता च मोहाज्जन्तुरचेतनः ।
स जायते महाराज मूषिको निरपत्रपः ।। ७२ ।।
महाराज! जो पुरुष लज्जाका परित्याग करके अज्ञान और मोहके वशीभूत होकर धान, जौ, तिल, उड़द, कुलथी, सरसों, चना, मटर, मूँग, गेहूँ और तीसी तथा दूसरे-दूसरे अनाजोंकी चोरी करता है, वह मरनेके बाद पहले चूहा होता है ।। ७१-७२ ।।