माण्डूक्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य व गौड़पादकारिका सहित)

माण्डूक्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य व गौड़पादकारिका सहित)
Mandukya Upanishad Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य / गौड़पादाचार्य द्वारा
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११२ माण्डूक्योपनिषद् [ गौ० का०
जीवकी उत्पत्तिके विषयमें दृष्टान्त
| अजाति ब्रह्माकार्पण्यं वक्ष्या-<br>मीति प्रतिज्ञातम् । तत्सिद्धयर्थं<br>हेतुं दृष्टान्तं च वक्ष्यामीत्याह— | मैं अजन्मा ब्रह्मका जो कृपण-<br>भावसे रहित है, वर्णन करता हूँ—<br>ऐसी प्रतिज्ञा की है। उसकी सिद्धिके<br>लिये हेतु और दृष्टान्त भी बतलाता<br>हूँ—इस अभिप्रायसे कहते हैं— |
आत्मा ह्याकाशवज्जीवैर्घटाकाशैरिवोदितः । घटादिवच्च संघातैर्जातावेतन्रिदर्शनम् ॥ ३ ॥
आत्मा आकाशके समान है; वह घटाकाशोंके समान जीवरूपसे उत्पन्न हुआ है । तथा [ मृत्तिकासे ] घटादिके समान देहसंघातरूपसे भी उत्पन्न हुआ कहा जाता है । आत्माकी उत्पत्तिके विषयमें यही दृष्टान्त है ॥ ३ ॥
| आत्मा परो हि यस्मादाकाश-<br>वत्सूक्ष्मो निरवयवः सर्वगतः<br>आकाशवदुक्तो जीवैः क्षेत्रज्ञैर्घटा-<br>काशैरिव घटाकाशतुल्य उदितः<br>उक्तः स एवाकाशसमः पर<br>आत्मा । | क्योंकि परमात्मा ही आकाशवत्<br>अर्थात् आकाशके समान सूक्ष्म<br>निरवयव और सर्वगत कहा गया है<br>और वही घटाकाशसदृश - क्षेत्रज्ञ<br>जीवोंके रूपमें उत्पन्न हुआ कहा<br>गया है, इसलिये वह परमात्मा ही,<br>आकाशके समान है । |
| अथ वा घटाकाशैर्यथाकाश<br>उदित उत्पन्नस्तथा परो जीवात्म-<br>भिरुत्पन्नः । जीवात्मनां परस्मा-<br>दात्मन उत्पत्तिर्या श्रूयते वेदान्तेषु | अथवा यों समझो कि जिस<br>प्रकार घटाकाशोंके रूपमें आकाश<br>उत्पन्न हुआ है उसी प्रकार परमात्मा<br>जीवात्माओंके रूपसे उत्पन्न हुआ<br>है । तात्पर्य यह है कि वेदान्तोंमें<br>जो परमात्मासे जीवात्माओंकी उत्पत्ति |