भारतकोश
माण्डूक्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य व गौड़पादकारिका सहित)

माण्डूक्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य व गौड़पादकारिका सहित)

Mandukya Upanishad Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य / गौड़पादाचार्य द्वारा

DevanagariHindipublished301 पृष्ठ

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श्रीहरिः

विषय-सूची

विषयपृष्ठ
१. शान्तिपाठ... ... १

आगमप्रकरण

विषयपृष्ठ
२. भाष्यकारका मङ्गलाचरण... ... २
३. सम्बन्धभाष्य... ... ३
४. ॐ ही सब कुछ है... ... ६
५. ओंकारवाच्य ब्रह्मकी सर्वात्मकता... ... ८
६. आत्माका प्रथम पाद—वैश्वानर... ... १०
७. आत्माका द्वितीय पाद—तैजस... ... १३
८. आत्माका तृतीय पाद—प्राज्ञ... ... १५
९. प्राज्ञका सर्वकारणत्व... ... १८
१०. एक ही आत्माके तीन भेद... ... १९
११. विश्वादिके विभिन्न स्थान... ... २०
१२. विश्वादिका त्रिविध भोग... ... २६
१३. त्रिविध भोक्ता और भोग्यके ज्ञानका फल... ... २६
१४. प्राण ही सबकी सृष्टि करता है... ... २७
१५. सृष्टिके विषयमें भिन्न-भिन्न विकल्प... ... २९
१६. चतुर्थ पादका विवरण... ... ३२
१७. तुरीयका स्वरूप... ... ३५
१८. तुरीयका प्रभाव... ... ४२
१९. विश्व और तैजससे तुरीयका भेद... ... ४३
२०. प्राज्ञसे तुरीयका भेद... ... ४४
२१. तुरीयका स्वप्न-निद्राशून्यत्व... ... ४६
२२. बोध कब होता है ?... ... ४८
२३. प्रपञ्चका अत्यन्ताभाव... ... ५०
२४. गुरु-शिष्यादि विकल्प व्यावहारिक है... ... ५१
२५. आत्मा और उसके पादोंके साथ ओंकार और उसकी मात्राओंका तादात्म्य... ... ... ५२