माण्डूक्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य व गौड़पादकारिका सहित)
Mandukya Upanishad Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य / गौड़पादाचार्य द्वारा
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विषय पृष्ठ
२६. अकार और विश्वका तादात्म्य ... ... ५३ २७. उकार और तैजसका तादात्म्य ... ... ५४ २८. मकार और प्राज्ञका तादात्म्य ... ... ५६ २९. मात्राओंकी विश्वादिरूपता ... ... ५७ ३०. ओंकारोपासकका प्रभाव ... ... ५९ ३१. ओंकारकी व्यस्तोपासनाके फल ... ... ५९ ३२. अमात्र और आत्माका तादात्म्य ... ... ६० ३३. समस्त और व्यस्त ओंकारोपासना ... ... ६२ ३४. ओंकारार्थज्ञ ही मुनि है ... ... ६५
वैतथ्यप्रकरण
३५. स्वप्नदृष्ट पदार्थोंका मिथ्यात्व ... ... ६७ ३६. जाग्रद्दृश्य पदार्थोंके मिथ्यात्वमें हेतु ... ... ७१ ३७. स्वप्नमें मनःकल्पित और इन्द्रियग्राह्य दोनों ही प्रकारके पदार्थ मिथ्या हैं ... ... ... ७६ ३८. जाग्रत्में भी दोनों प्रकारके पदार्थ मिथ्या हैं ... ७७ ३९. इन मिथ्या पदार्थोंकी कल्पना करनेवाला कौन है ? ... ७८ ४०. इनकी कल्पना करनेवाला और इनका साक्षी आत्मा ही है ... ७९ ४१. पदार्थकल्पनाकी विधि ... ... ७९ ४२. आन्तरिक और बाह्य दोनों प्रकारके पदार्थ मिथ्या हैं ... ८० ४३. आन्तरिक और बाह्य पदार्थोंका भेद केवल इन्द्रियजनित है ... ८२ ४४. पदार्थकल्पनाकी मूल जीवकल्पना है ... ... ८३ ४५. जीवकल्पनाका हेतु अज्ञान है ... ... ८४ ४६. अज्ञाननिवृत्ति ही आत्मज्ञान है ... ... ८५ ४७. विकल्पकी मूल माया है ... ... ८६ ४८. मूलतत्त्वसम्बन्धी विभिन्न मतवाद ... ... ८७ ४९. आत्मा सर्वाधिष्ठान है ऐसा जाननेवाला ही परमार्थदर्शी है ... ९१ ५०. द्वैतका असत्यत्व वेदान्तवेद्य है ... ... ९२ ५१. परमार्थ क्या है ? ... ... ९४ ५२. अद्वैतभाव ही मङ्गलमय है ... ... १०० ५३. तत्त्ववेत्ताकी दृष्टिमें नानात्वका अत्यन्ताभाव है ... १०१ ५४. इस रहस्यके साक्षी कौन थे ? ... ... १०३