भारतकोश
माण्डूक्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य व गौड़पादकारिका सहित)

माण्डूक्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य व गौड़पादकारिका सहित)

Mandukya Upanishad Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य / गौड़पादाचार्य द्वारा

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विषयपृष्ठ
५५. तत्त्वदर्शनका आदेश... ... १०४
५६. तत्त्वदर्शीका आचरण... ... १०४
५७. अविचल तत्त्वनिष्ठाका विधान... ... १०६

अद्वैतप्रकरण

५८. भेददर्शी कृपण है | ... ... १०८ ५९. अकार्पण्यनिरूपणकी प्रतिज्ञा | ... ... ११० ६०. जीवकी उत्पत्तिके विषयमें दृष्टान्त | ... ... ११२ ६१. जीवके विलीन होनेमें दृष्टान्त | ... ... ११३ ६२. आत्माकी असंगतामें दृष्टान्त | ... ... ११४ ६३. व्यावहारिक जीवभेद | ... ... १२० ६४. जीव आत्माका विकार या अवयव नहीं है | ... ... १२१ ६५. आत्माकी मलिनता अज्ञानियोंकी दृष्टिमें है | ... ... १२२ ६६. आत्मैकत्व ही समीचीन है | ... ... १२७ ६७. श्रुत्युक्त जीव-ब्रह्मभेद गौण है | ... ... १२८ ६८. दृष्टान्तयुक्त उत्पत्ति-श्रुतिकी व्यवस्था | ... ... १३१ ६९. त्रिविध अधिकारी और उनके लिये उपासनाविधि | ... ... १३४ ७०. अद्वैतात्मदर्शन किसीका विरोधी नहीं है | ... ... १३६ ७१. अद्वैतात्मदर्शनके अविरोधी होनेमें हेतु | ... ... १३८ ७२. आत्मामें भेद मायाहीके कारण है | ... ... १३९ ७३. जीवोत्पत्ति सर्वथा असंगत है | ... ... १४१ ७४. उत्पत्तिशील जीव अमर नहीं हो सकता | ... ... १४२ ७५. सृष्टिश्रुतिकी संगति | ... ... १४३ ७६. श्रुति कार्य और कारण दोनोंका प्रतिषेध करती है | ... ... १४७ ७७. अनात्मप्रतिषेधसे अजन्मा आत्मा प्रकाशित होता है | ... ... १५० ७८. सद्वस्तुकी उत्पत्ति मायिक होती है | ... ... १५१ ७९. असद्वस्तुकी उत्पत्ति सर्वथा असम्भव है | ... ... १५३ ८०. स्वप्न और जाग्रति मनके ही विलास हैं | ... ... १५४ ८१. तत्त्वबोधसे अमनीभाव | ... ... १५६ ८२. आत्मज्ञान किसे होता है ? | ... ... १५७ ८३. शान्तवृत्तिका स्वरूप | ... ... १५८ ८४. सुषुप्ति और समाधिका भेद | ... ... १६० ८५. ब्रह्मका स्वरूप | ... ... १६१