भारतकोश
माण्डूक्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य व गौड़पादकारिका सहित)

माण्डूक्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य व गौड़पादकारिका सहित)

Mandukya Upanishad Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य / गौड़पादाचार्य द्वारा

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विषयपृष्ठ
८६. अस्पर्शयोगकी दुर्गमता ... ...१६७
८७. अन्य योगियोंकी शान्ति मनोनिग्रहके अधीन है ... ...१६८
८८. मनोनिग्रह धैर्यपूर्वक ही हो सकता है ... ...१६९
८९. मनोनिग्रहके विघ्न ... ...१६९
९०. मन कब ब्रह्मरूप होता है ? ... ...१७३
९१. परमार्थ सत्य क्या है ? ... ...१७५

अलातशान्तिप्रकरण

९२. नारायण-नमस्कार ... ... | १७८ ९३. अद्वैतदर्शनकी वन्दना ... ... | १८० ९४. द्वैतवादियोंका पारस्परिक विरोध ... ... | १८१ ९५. द्वैतवादियोंद्वारा प्रदर्शित अजातिका अनुमोदन ... ... | १८३ ९६. स्वभावविपर्यय असम्भव है ... ... | १८४ ९७. जीवका जरामरण माननेमें दोष ... ... | १८६ ९८. सांख्यमतपर वैशेषिककी आपत्ति ... ... | १८७ ९९. हेतु और फलके अन्योन्यकारणत्वमें दोष ... ... | १९१ १००. अजातवाद-निरूपण ... ... | १९८ १०१. सदसदादिवादोंकी अनुपपत्ति ... ... | १९८ १०२. हेतु-फलका अनादित्व उनकी अनुत्पत्तिका सूचक है ... ... | २०१ १०३. बाह्यार्थवाद-निरूपण ... ... | २०२ १०४. विज्ञानवादिकर्तृक बाह्यार्थवादनिषेध ... ... | २०४ १०५. विज्ञानवादका खण्डन ... ... | २०८ १०६. उपक्रमका उपसंहार ... ... | २१० १०७. प्रपञ्चके असत्यत्वमें हेतु ... ... | २१२ १०८. स्वप्नका मिथ्यात्वनिरूपण ... ... | २१३ १०९. स्वप्न और जाग्रत्का कार्य-कारणत्व व्यावहारिक है ... ... | २१५ ११०. जगदुत्पत्तिका उपदेश किनके लिये है ? ... ... | २२० १११. सन्मार्गगामी द्वैतवादियोंकी गति ... ... | २२१ ११२. उपलब्धि और आचरणकी अप्रमाणता ... ... | २२२ ११३. परमार्थ वस्तु क्या है ? ... ... | २२३ ११४. विज्ञानाभासमें अलातस्फुरणका दृष्टान्त ... ... | २२५ ११५. आत्मामें कार्य-कारणभाव क्यों असम्भव है ? ... ... | २३० ११६. हेतु-फलभावके अभिनिवेशका फल ... ... | २३१

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