भारतकोश
संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण

संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण

Markandeya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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* श्रीमार्कण्डेयपुराणका उपसंहार और माहात्म्य *


अब आप और क्या सुनना चाहते हैं? जो मनुष्य इन सब प्रसङ्गोंका श्रवण तथा जनसमुदायमें पाठ करता है, वह सब पापोंसे मुक्त होकर ब्रह्ममें लीन हो जाता है। पितामह ब्रह्माजीने जो अठारह पुराण कहे हैं, उनमें इस विख्यात मार्कण्डेयपुराणको सातवाँ पुराण समझना चाहिये। पहला ब्रह्मपुराण, दूसरा पद्मपुराण, तीसरा विष्णुपुराण, चौथा शिवपुराण, पाँचवाँ श्रीमद्भागवतपुराण, छठा नारदीय पुराण, सातवाँ मार्कण्डेयपुराण, आठवाँ अग्निपुराण, नवाँ भविष्यपुराण, दसवाँ ब्रह्मवैवर्तपुराण, ग्यारहवाँ नृसिंहपुराण, बारहवाँ वाराहपुराण, तेरहवाँ स्कन्दपुराण, चौदहवाँ वामनपुराण, पंद्रहवाँ कूर्मपुराण, सोलहवाँ मत्स्यपुराण, सत्रहवाँ गरुडपुराण और अठारहवाँ ब्रह्माण्डपुराण माना गया है। जो प्रतिदिन अठारह पुराणोंका नाम लेता तथा प्रतिदिन तीनों समय उनका जप करता है, उसे अश्वमेध यज्ञका फल मिलता है। मार्कण्डेयपुराण चार प्रश्नोंसे युक्त है। इसके श्रवणसे सौ करोड़ कल्पोंके किये हुए पाप नष्ट हो जाते हैं। ब्रह्महत्या आदि पाप तथा अन्य अशुभ इसके श्रवणसे उसी प्रकार नष्ट होते हैं, जैसे हवाका झोंका लगनेसे रूई उड़ जाती है। इसके श्रवणसे पुष्करतीर्थमें स्नान करनेका पुण्य प्राप्त होता है।*

वन्ध्या अथवा मृतवत्सा स्त्री यदि यथावत् इस पुराणका श्रवण करे तो वह समस्त शुभ लक्षणोंसे सम्पन्न पुत्र प्राप्त करती है। इसका श्रवण करनेसे मनुष्य आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य, धन, धान्य, पुत्र तथा अक्षय वंश प्राप्त करता है। ब्रह्मन्! इस पुराणको पूरा सुन लेनेके बाद जो आवश्यक कर्तव्य है, वह सुनो। विधिपूर्वक अग्निकी स्थापना करके विद्वान् पुरुष होम करे; पुराणस्वरूप भगवान् गोविन्दका हृदयकमलमें ध्यान करके गन्ध, पुष्प, माला, वस्त्र तथा नैवेद्य आदिके द्वारा पूजन करे। वाचककी पत्नीसहित पूजा करे। तत्पश्चात् उन्हें दूध देनेवाली सवत्सा गौ, खेतोंसे भरी हुई भूमि, सुवर्ण और चाँदी आदि वस्तुएँ यथाशक्ति दान करनी चाहिये। राजाओंको उचित है कि उन्हें ग्राम आदि तथा सवारी भी दें। वाचकको संतुष्ट करके उसके द्वारा स्वस्ति कहलाये। जो वाचककी पूजा न करके एक श्लोक भी सुनता है, वह उसके पुण्यका भागी नहीं होता; विद्वानोंने उसे शास्त्रचोर कहा है। मार्कण्डेयपुराणकी समाप्तिपर भारी उत्सव कराये और सब पापोंसे मुक्त होनेके लिये दूध देनेवाली गौ दान करे। साथ ही सपत्नीक ब्राह्मणको वस्त्र, रत्न, कुण्डल, अंगा, पगड़ी, ओढ़ने-बिछौने आदिसहित शय्या, जूता, कमण्डलु, सोनेकी अँगूठी, सप्तधान्य, भोजनके लिये काँसेकी थाली और घृतपात्र दान करे। ऐसा करनेसे मनुष्य कृतकृत्य हो जाता है। जो उत्तम विधिके साथ इसका श्रवण करता है, वह हजार


* ब्राह्मं पाद्मं वैष्णवं च शैवं भागवतं तथा। तथान्यन्नारदीयं च मार्कण्डेयं च सप्तमम्॥
आग्नेयमष्टमं प्रोक्तं भविष्यं नवमं स्मृतम्। दशमं ब्रह्मवैवर्त्तं नृसिंहैकादशं तथा॥
वाराहं द्वादशं प्रोक्तं स्काान्दञ्च त्रयोदशम्। चतुर्दशं वामनकं कौर्मं पञ्चदशं तथा॥
मात्स्यं च गारुडं चैव ब्रह्माण्डं च ततः परम्। अष्टादशपुराणानां नामधेयानि यः पठेत्॥
त्रिसन्ध्यं जपते नित्यं सोऽश्वमेधफलं लभेत्। चतुःप्रश्नसमोपेतं पुराणं मार्कण्डेयांजकम्।
श्रुतेन नश्यते पापं कल्पकोटिशतैः कृतम्। ब्रह्महत्यादिकान्यपि ह्यन्यान्यशुभानि च॥
तानि सर्वाणि नश्यन्ति तूलं वाताहतं यथा। पुष्करस्नानजं पुण्यं श्रवणादस्य जायते॥
(१३७। ८-१४)