भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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पृष्ठ 167

१७४ मार्क्सवाद और रामराज्य वर्ग-विन्यास गलत सिद्ध हो गया। अबतक लोग 'गिनी फाउल' को मुर्गीकी किस्मका समझते थे। पर अब रक्तकी परीक्षासे वह शुतुरमुर्गकी जातिका मालूम होता है। इसी तरह 'विकासवाद' के लेखकने भालूको श्वान-जातिमें लिखा है। परंतु उसके रुधिरकी परीक्षासे वह सील आदिकी भाँति जलजन्तु सिद्ध हो रहा है। इसके अतिरिक्त जब विकासवादी एक ही प्रकारके मूल प्राणीसे समस्त भूमण्डलके प्राणियोंकी उत्पत्ति मानता है, जब सबके संस्थान एक समान गिनता है और एक ही तरीकेसे विकास मानता है, तब इन सबके रुधिरकण एक ही बनावटके क्यों नहीं होते ? किसी जातिके प्राणीका रुधिरकण गोल, किसीका चपटा क्यों होता है ? यह रुधिरका पृथक्त्व सिद्ध करता है कि प्रत्येक जातिका शरीर भिन्न प्रकारके रुधिरकणोंसे बना होता है। इससे यह सिद्ध होता है कि समस्त जातियाँ एक ही प्रकारके प्राणीसे विकसित नहीं हुई, प्रत्युत सबकी उत्पत्ति मूलतः अलग-अलग हुई। तुलनात्मक शरीर-रचना-शास्त्रसे विकासवादकी बहुत ही सामग्री मिलती है। बाह्यरूपमें अत्यन्त भिन्नता होनेपर भी कई प्राणियोंका जातिविभाग इस शास्त्रने एक ही वर्गमें किया है। आन्तरिक रचना-साम्यपर इसका निर्णय होता है। तदनुसार 'चमगादड, ह्वेल और गौ अनुक्रमसे नभचर, जलचर और भूमिचर होनेपर भी तीनोंका एक ही वर्गमें अन्तर्भाव किया गया है, क्योंकि तीनो ही स्तनधारी है। इसके अनुसार अनेक जातिके कुत्तोंमें साधर्म्य-वैधर्म्य दोनों ही मौजूद हैं। साधर्म्यसे सब कुत्ते एक ही वर्गके हैं। वैधर्म्यसे बुलडाग, ताजी और लैडी आदि अलग-अलग हैं, किंतु हैं सब एक ही पूर्व जन्तुकी सतति । इसी तरह लोमडी, सियार और भेडिया वैषम्यसे अलग हैं । पर मांसभक्षण आदि साम्यसे एक ही पूर्वजन्तुकी सतति प्रतीत होते हैं। बिल्ली और बनबिलाव अलग होते हुए भी एक ही हैं। चीता, व्याघ्र, सिंह अलग-अलग होते हुए भी एक हैं। इन सबका मांसाहारी, स्तनधारी कक्षामें समावेश होता है। इनमे व्याघ्र तथा सिंहके मेलसे और भेड़िये तथा कुत्तेके मेलसे संतति भी होती है। भालू भी मांस-भक्षक प्राणी है। इसकी आन्तर-रचना कुत्ते, बिल्लीकी रचनासे कुछ पृथक् है। पर इसका मेल इन्हींके साथ मिलता है। मांस-भक्षकोंमें बिज्जु, नेवला, ऊदबिलाव अलग-अलग होते हुए भी एक ही प्रकारके हैं। ह्वेल मछली भी मांसभक्षक है। यह जन्तु पहले स्थलचारी था, पर अब इसका पानी ही घर हो गया। इसके पैर कमजोर और नावके चप्पूकी भाँति हो गये। शरीरमें इसके बल भी कम होता है। यह स्तनधारी, मांसभक्षी प्राणी है। स्तनधारियोंमें तीक्ष्ण दाँतवालोंका एक दल चूहा, छुछूंदर, घूस, गिलहरी, शशक और स्याहीका है। ये वस्तुओको कुतरते हैं। अतः तीक्ष्णदन्ती कहलाते हैं। इनमें ही उड़न गिलहरी भी है। चमगादड़ भी इसी