भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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विकासवाद

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इसपर उनकी चार कल्पनाएँ हँ-(१) प्राणियोंकी मानसिक प्रेरणासे अस्थियाँ बनीं, ( २ ) कठोर काम करते-करते जैसे मनुष्योंके शरीरमें घट्टे पड़ जाते हैं, वैसे ही श्रम करनेसे प्राणियोंके देहमें अस्थियाँ बन गयीं, ( ३ ) जब चूनेके अधिकांश भागवाले पदार्थ खाये गये, तब हड्डियाँ पैदा हुई और ( ४ ) शरीरके अंदर नस, नाड़ी आदि अवयव ही हड्डियाँ बन गये। परन्तु ये चारो पक्ष असंगत हैं। मनका असर उसीपर पड़ता है, जिसका मनसे सम्बन्ध हो। अस्थिका मनसे कोई सम्बन्ध नहीं। दाँतपर सुई चुभानेसे मनपर कुछ भी असर, नहीं पड़ता। अतः 'मानसिक प्रेरणासे अस्थियाँ बनीं,' यह नहीं कहा जा सकता। यों तो सम्पूर्ण संसार ही मनकी कल्पना है, फिर अस्थि ही क्यों ? घट्टोंका दृष्टान्त भी ठीक नहीं, क्योकि बाहरी वस्तुके संघर्षसे बाहरी ही कठोरता आती है। बाह्य संघर्षसे शरीरके अंदर हड्डियाँ कैसे बनेगीं ? चूनेवाले भोजनसे भी हड्डियाँ नहीं बन सकतीं। सभी जानते हैं कि 'खूनसे हड्डियाँ पैदा होती हैं,' परन्तु लाखो जूँ, चमड़े, कीलने, खटमल मनुष्यों, पशुओके खून पीते हैं, जोके खून पीती ह, परन्तु उनमें हड्डी नहीं बनी। चींटियाँ हड्डियोंको चुनकर खाती हैं, उनमें भी हड्डी पैदा नही हुई। 'नस-नाड़ियों हड्डी बन जाती हैं' यह भी बात युक्तिहीन है। बच्चोंके मुखमें पहले दाँत नहीं होते, कुछ दिन बाद दाँत निकल आते हैं। यदि नस-नाड़ियोंका दाँत बन जाना माने तो उधर थोडे ही दिनोंमे वे दाँत गिर जाते हैं। गिरते समय नस-नाडियोंसे उनका कोई लगाव प्रतीत नहीं होता। कुछ दिनो बाद फिर नये दाँत निकलते हैं, यदि पहली नस-नाड़ियो चली गयी तो यह दूसरी कहाँसे आयीं ? वृद्ध होनेपर वे दाँत भी चले जाते हैं, तब भी किसी नस नाडीका लगाव मालूम नहीं होता। डाक्टर भी दाँत निकाल देते हैं, पर उनके साथ नस आदि कोई चीज नहीं निकलती। दाँत तो कीलोकी तरह गड़े होते हैं, शरीर या किसी दूसरे अङ्गसे उनका वास्ता नहीं प्रतीत होता। इसी तरह भीतरका सारा अस्थिपञ्जर अलग ही प्रतीत होता है, उसका वास्ता नस नाड़ी, मास, त्वचा किसीसे नहीं । फिर ऐसी निराली वस्तुको अस्थिहीन प्राणियोंने कैसे प्राप्त किया ? विकासवादी कहते हैं कि 'परिस्थितियोसे ही हड्डियाँ उत्पन्न हुईं, परन्तु परिस्थिति भी हड्डी बनानेमें असमर्थ है। भाई- बहन दोनो एक ही परिस्थितिमें उत्पन्न होते और बढ़ते हैं। पर बहनके