मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६२ मार्क्सवाद और रामराज्य तैस्तैरतुष्टहृदय. पुरुषं विधाय ब्रह्मावलोकधिषणं मुदमाप देवः ॥ ( भागवत ११ । ९ । २८ ) कहा जाता है कि संसारमे जितने प्राणी मिलते हैं, सब अनादि नहीं है। पहले सीधी-सादी रचना हुई, पश्चात् क्लिष्ट रचनावाले प्राणी बने। भारतमें व्याघ्र, सिंह होते हैं, इंगलैंडमें नही होते। साँप, बिच्छू आदि उष्ण-प्रदेशोमें होते हैं, यूरोपके शीत-प्रदेशमें नही होते। जिराफ अफ्रीकामें और मोर भारतमे ही होते हैं। जैसी भिन्नता पशु-पक्षियों, वनस्पतियोंमें होती है, वैसी ही मनुष्योंमें भी होती है। आस्ट्रेलियामें यूरोपियनोंके जानेके पहले खरगोश नहीं थे, बादमें जहाजसे पहुँचाये जानेपर वहाँ खरगोशोंकी बहुतायत होती गयी। गेलापेगस द्वीप विचित्र प्राणियोंके लिये प्रसिद्ध है। वहाँ गोह, गिरगिट, छिपकली, सर्प तथा पक्षी-श्रेणीके जन्तु बहुत हैं। इस प्रकारके जन्तु अफ्रीका, भारत, अमेरिकामे भी विद्यमान हैं, परंतु सबकी अपेक्षा अमेरिकाके प्राणियोंके साथ गेलापेगसवाले प्राणियोंका अधिक मेल है। ये अमेरिका निवासियोके वंशज हैं। अमेरिका इस द्वीपके समीप है, इससे मालूम होता है कि कभी पूर्वमे जब अमेरिका और इस द्वीपकी भूमि मिली रही होगी, तब अमेरिकासे प्राणी जाकर वहाँ रहने लगे होगे। एक द्वीपसे दूसरे द्वीपमें, दूसरेसे तीसरेमे बसे। परिस्थितियोंके कारण कुछ भिन्नता हो जाती है। वस्तुतः वे सब एक ही पूर्वजोकी संतति हैं। अफ्रीकाके समीप स्थित नर्स द्वीपके प्राणियोंकी अफ्रीकाके प्राणियोंके साथ बहुत कुछ तुल्यता है। प्रशान्त महासागर (पैसेफिक) के द्वीपोंमे घोंघोंकी अनेक जातियाँ हैं। भूगर्भशास्त्री यह बतलाते हैं कि 'पूर्वकालमे इन द्वीप-समूहोंकी भूमि एकमे जुडी थी। अर्थात् यह पहले महाद्वीप था, इसीसे सब घोंघोंका मेल है। सब एक ही पिताकी संतति हैं।' किन्हीं दो देशोके प्राणियोंकी भिन्नता और समानता दोनो प्रदेशोकी दूरता और निकटतापर अवलम्बित है। दूर होनेसे भिन्नता होगी, समीपसे समता होगी, किंतु कभी-कभी दूरस्थ प्राणियोंमें बहुत अधिक समानता होती है। जैसे ब्रिटेन और जापानमें बहुत अन्तर होनेपर भी इन देशोके प्राणियोंमें बहुत समानता है। आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड बहुत पास पास हैं, परंतु वहाँके प्राणियोंमें बहुत बड़ा वैषम्य है। अतः इनकी भेदक प्रकृति ही है। यदि दो नजदीकके स्थानोको कोई पहाड़ जुदा करे तो एक जगहके नदी-नालेवाली मछलियाँ जैसी होगी, उसी तरहकी दूसरी जगहवाली नहीं होगी, क्योकि मछलियाँ पहाड़ लाँघकर नहीं जा सकता। इसीलिये समीप होते हुए भी उन जीवोमे एक- रूपता नहीं होगी। दूर-देश होनेपर भी यदि गमनागमन रहे तो समता अधिक