मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
पृष्ठ 186, कुल 866 में से
संदर्भ में पढ़ेंक्या है ? पक्षी सर्पोंमें बहुत नजदीक हैं, पक्षीका विकास सर्पणशील प्राणीसे हुआ है; अतः उचित था कि उन सर्पणशील प्राणियोंके गुण पक्षियोंमें हों। परन्तु पक्षियोंमें क्या सर्पणशील प्राणियों-सरीखे दाँत होते हैं ! एक चमगादड़को छोड़कर किसी अन्य पक्षीके दाँत नहीं हैं। परन्तु चमगादड़ सर्पणशीलसे पक्षी नहीं हो रहा है, उसके लिये तो पशुओंसे पक्षी होनेकी बात कहना अधिक संगत है क्योंकि उसके स्तन और कान होते हैं। जब सर्पोंमें सर्पणशीलोंके गुण नहीं तब पिछली योनियोंमें उसके चक्कर काटनेकी बात कैसे सिद्ध होगी ? केवल एक-दो बातें देखकर कल्पनाका इतना बड़ा महल खड़ा करना दुस्साहस ही है। उसी तरह मण्डूक यदि मछलीसे हुआ होता तो उसको पैर न होने चाहियें थे । वह बढ़नेके समय ही गलफड़ोंसे श्वास लेता है। उसकी यह अवस्था गर्भावस्था ही है। गर्भावस्थामें तो मनुष्यका बच्चा भी नालके द्वारा प्राण और पोषण पाता है। इतनेहीसे क्या उसे मछली कहा जा सकता है ? यदि ऐसा होता तो सभी बच्चे पहले गलफड़ेसे श्वास लेते, क्योंकि विकासवादीके अनुसार सभीका विकास [L