भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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विकासवाद १७५ होकर चलना, मस्तिष्कका बहुत विकास, वाणी-द्वारा स्पष्ट बोलनेकी शक्ति और विचार करनेकी शक्ति यह चार मनुष्यकी विशेषताएँ हैं। पहली दोनों विशेषताएँ तात्त्विक नहीं प्रत्युत परिणामकी हैं अर्थात् छोटाई-बड़ाईका ही अन्तर है। खड़े होकर चलना भी मस्तिष्ककी उन्नतिका परिणाम है। 'वानरोंकी जातियाँ, उपजातियाँ तथा वंश अनेक हैं। लीमर अर्धबंदर है, जो हाथ-पैरसे ही बंदर प्रतीत होता है। मामोंसेट भी आकारमें लीमर-सदृश होता है, पर वह वानरोंसे अधिक मिलता है। इसके नाखून पंजेदार होते हैं। सामान्य बंदर प्रसिद्ध ही है। वनमानुष भी इसी कक्षाका वंश है। इसके पाँच प्रकार हैं—गिवन, ओरांग, औटांग, चिपाजी और गोरिल्ला। इनके दाँत मनुष्यों-जैसे होते हैं। नाक पीछेकी ओर झुकी होती है, पर अंदरकी ओर दो छिद्र नहीं होते। इनके हाथ पैरोंसे अधिक लंबे होते हैं। गालकी थैली और पूँछ बिल्कुल नहीं होती। गिवन जातिकी मादा अपने बच्चेका मुँह धोती है। चिपाजी शरीरसे बहते हुए खूनको बंद करनेकी चेष्टा करता है। वैज्ञानिकोंका कहना है कि चिपाजीकी बुद्धि नौ महीनेके बालकके समान होती है। मनुष्यकी खास विशेषताएँ दो ही