भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

पृष्ठ 213, कुल 866 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 213

१९८ मार्क्सवाद और रामराज्य है और अपनेको सूर्यवंशी कहती है और मनु वैवस्वतके मूल विवस्वान् सूर्यको अपना इष्ट समझती है । इन मिस्रवालोंकी ही संतति अमेरिकाके मूल निवासी बतलाये जाते हैं । वे भी सूर्यवंशी राजा रामचन्द्रका 'राम-सीतव' उत्सव मनाते हैं । अन्वेषकोंको वहाँ सूर्यका मन्दिर भी मिला है । मनुकी मछली एव नूहके प्लावनकी कथा मिस्र, बेबिलोन, सीरिया, चाल्डिया, जूडिया, फारस, अरब, ग्रीस, भारत, चीन, अमेरिका आदि संसारके सभी देशों एव सभी जातियोंमें पायी जाती है । इससे भी सिद्ध होता है कि मनुसे ही समस्त मनुष्योंकी उत्पत्ति हुई है। बाइबिलमें बतलायी हुई नूहकी पीढ़ियाँ काल्पनिक हैं। आदमसे नूहतक ११ पीढ़ियाँ होती हैं और वर्ष-संख्या २२६२ है। नूहके पुत्र सेमसे इब्राहीमतक ११ पीढ़ियोंके तेरह सौ दस वर्ष कहे गये हैं । यह गणना विश्वास योग्य नहीं । जब मनु और नूह एक ही हैं तब उन्हें हुए लाखो वर्ष हो गये । कहा जाता है कि मिस्रकी भाषामें 'नून' शब्दका 'मछली' अर्थ होता है । 'नून' अक्षर फिनीशियामें 'ईल' नामक मछलीकी शकलका होता है । अंग्रेजी तथा अरबीमें भी यह अक्षर मछलीकी तरह ही होता है । मछलीके ही ढगकी नाव होती है। हजरत नूहको 'नौवा' भी कहा जाता था । इस नौवाका सम्बन्ध मनुके जलप्लावनसे ही है । यह नाव और मनुकी मछली एक ही है । मनुको वैवस्वत कहा जाता है । विवस्वान् सूर्य है । हजरत नूहके दो पुत्र हेम, सेम—सूर्यवंश और चन्द्रवंश ही हैं । हेमगर्भ, हिरण्यगर्भ, सूर्यवंशका ही बोधक है और सेम=सोम चन्द्रवंशका बोधक है । सूर्यवंशियोंकी पुत्री इलासे ही सोमवशकी उत्पत्ति हुई है । इस दृष्टिसे दोनों मनुके पुत्र कहे जा सकते हैं । मनुस्मृतिके अनुसार क्षत्रियोंसे ही संसारके मनुष्योंकी उत्पत्ति हुई है— शनकैस्तु क्रियालोपादिमाः क्षत्रियजातयः । वृषलत्वं गता लोके ब्राह्मणादर्शनेन च ॥ पौण्ड्रकाश्चौड्रद्रविडाः काम्बोजा यवनाः शकाः । पारदाः पह्लवाश्चीनाः किराता दरदाः खशाः ॥ ( मनुस्मृति १० । ४३-४४ ) इतिहासकार मैनिंग कहता है कि "यह बात विद्वानोंने मान ली है कि 'मनुष्य जातिके पूर्वपितामह 'मनु' या 'मनम्' उसी तरह हैं जिस तरह जर्मनोंके 'मनस्' हैं, जो ट्यूटनोंके मूल पुरुष माने जाते हैं । अंग्रेजीका 'मैन' तथा जर्मनका 'मन्न' शब्द 'मनु' से उसी तरह मिलता है, जैसे जर्मनका 'मेनष्' और संस्कृतका 'मनुष्य' शब्द मिलता है । अतः मनुसे ही मनुष्योंकी उत्पत्ति हुई है।" वह मनु मूल पुरुष हिरण्यगर्भसे अभिन्न समझा जाता है और उसी