मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअतएव पुत्रके रहते हुए पुत्री (कन्या) को श्राद्धादिका अधिकार नहीं है। इसीलिये पुत्रके रहने हुए भारतीय धर्मशास्त्रानुसार पुत्रीको दायाधिकार भी नहीं है। परंतु पुत्र न होनेपर पुत्रीको पिण्डदानका अधिकार है और पुत्राभावमें पुत्री दायाधिकारिणी भी मानी जाती है। इस तरह 'सबमें सबका अधिकार है', यह सिद्धान्त गलत है। फिर भी विश्वप्रपञ्चकी सृष्टिमें जैसे ईश्वर कारण है, वैसे ही शुभाशुभ कर्मोंद्वारा जीव भी विश्वसृष्टिमें कारण है। जीवोंके कर्म-वैचित्र्यसे ही सृष्टिमें वैचित्र्य है। इस दृष्टिसे विश्वप्रपञ्चमें जीवोंका भी अधिकार है, अतः विश्वके आकाश, वायु, तेज, जल, पृथिवीके उपयोग करनेका अधिकार सबको ही है। इसीलिये योग्यता एव आवश्यकताके अनुसार चींटीको कणभर, हाथीको मनभरके अनुसार काम, दाम, आराम सबको ही मिलना चाहिये। इस रूपसे विशिष्ट भूमिसम्पत्ति आदिके अधिकारी विशिष्ट लोगोंको मान, आवास, स्थान एवं रोजी, रोजगार, उन्नतिका खुला रास्ता सबको ही मिलना चाहिये। द्वादशलक्षणी पूर्वमीमांसामें एक विचार चला है 'सर्वस्वदक्षिण याग' का, जिसमें सर्वस्व दक्षिणाकी चर्चा है। 'सर्वस्व, क्या है, माता-पिता भी सर्वस्वमें आते हैं या नहीं, उनका भी दान हो सकता है या नहीं, इत्यादि, इसपर उत्तर दिया गया कि सर्वस्वमें माता पिता अवश्य हैं, पर उनका दान नहीं हो सकता, क्योंकि स्वत्वनिवृत्तिपूर्वक परस्वत्वोत्पादन ही दान है। माता-पिताका स्वत्व इस प्रकारका नहीं है जिसकी निवृत्ति हो सके। पुनः विचार चला कि समग्र भूमिका दान हो सकता है या नहीं। यह विचार खण्ड भूमिके लिये नहीं है, क्योंकि खण्ड भूमिका तो दान होता ही है। इसीलिये शबर स्वामीने विचार करते हुए कहा कि 'अखण्डभूमि किसके पास हो सकती है ? हो सकती है सार्वभौम सम्राट्के पास, सर्वस्वदक्षिणमें अखण्डभूमिका दान प्रसक्त है, इसपर जैमिनिका सूत्र है— 'न भूमिर्देया स्यात् सर्वान् प्रत्यविशिष्टत्वात् ।' (मीमांसादर्श० ६।७।२।३) अर्थात् राजमार्ग, चत्वर, देवादि स्थानसहित अखण्डभूमिका दान नहीं हो सकता; क्योंकि वह सबकी है। यद्यपि यहाँ कुछ लोगोंने इसी आधारपर यह भी सिद्ध किया है कि भूमि किसी व्यक्तिकी नहीं होती, किंतु वह समाजकी होती है, इसीसे उसका दान नहीं हो सकता, किंतु पूर्वापर देखनेसे यह गलत सिद्ध होता है। उसका अभिप्राय इतना ही है कि चत्वर, राजमार्गादिसहित भूमिका दान नहीं हो सकता, क्योंकि हो सकता है कि प्रतिग्रहीता राजमार्गमें ही खेत, उद्यान बनाये और दूसरोंको चलनेसे रोके। अतः अखण्ड भूमण्डलका दान नहीं हो सकता। हाँ, देवस्थान, चत्वर, राजमार्गादि छोड़कर खण्ड