मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
पृष्ठ 314, कुल 866 में से
संदर्भ में पढ़ेंजाता और उनमें संघर्ष, विद्वेष फैलाकर अपना मतलब गाँठनेका प्रयत्न किया जाता है । लाखो वर्षोंके पुराने इतिहासमे किसीकी भूमि-सम्पत्ति, कल-कारखाना छीननेका श्रेणीबद्ध प्रयत्न नहीं होता था । हाँ, एक राजा दूसरे राजापर राज्य छीनने- के लिये प्रयत्न करता था । कुछ व्यक्ति कुछ व्यक्तियोंकी कोई वस्तु छीननेका प्रयत्न यदि करते थे तो वे दण्डके भागी होते थे । मार्क्सवादियोंके मनगढन्त इतिहासकी घटनाएँ केवल हजार-पाँच सौ वर्षकी ही हैं । सभी देशों, सभी धर्मोंके पुराने इतिहासोंमें मार्क्सवादी-क्रमकी गन्ध भी नहीं प्रतीत होती । इतना ही क्यों, युक्तियों एवं शास्त्रोंसे मालूम पड़ता है कि ऐसी क्रान्तियाँ क्षुद्रोपद्रवमात्र हैं । इनका कोई ऐतिहासिक महत्त्व नहीं । वेदों, रामायण, महाभारत तथा पुराणोंमें करोड़ों, अरबों वर्षों एवं अगणित युगों, कल्पों तथा विभिन्न सृष्टियोंके इतिहास हैं । जैसे प्रतिवर्ष वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा आदि ऋतुओका समान- रूपसे आवर्तन होता रहता है, वैसे ही प्रतिकल्प प्रतिसृष्टिमें समानरूपसे सूर्य, चन्द्र आदि उत्पन्न होते हैं । अनेक ढंगकी प्रधान-प्रधान वस्तुएँ एक-