भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 866 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 48

े मनके व्यापारोंका बोध नहीं होता । मनसे तो मनका पता लग सकता है,`

  • 'व्यापारोंका': yes.

परंतु मन एव अह मत्रका भान जिससे होता है उसका बोध—भास्यभूत मन

  • Wait! Look at एव अह मत्रका? Let's look closely at line 16: परंतु मन एवं अह मत्रका? Wait! अहंकारका or अहंभावका or अहं प्रत्ययका? Let's zoom into line 16: परंतु मन एव अह मत्रका? Wait: परंतु मन एव -> एवं? There is no anusvara on एव? Or is it एवम्? It's एव. Then: अह -> is there anusvara? अहं? No, wait: Look at the letters: त्र का? Wait: अहंकारका? Let's look at the letters after मन: (or एवं) Then: म्? Wait: "मन एवं अहम् प्रत्यय का"? Look at the characters: म् प्र त्य `